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‘डोपामिन लूप’;बेटे को ऑनलाइन गेमिंग की लत:पढ़ाई में मन नहीं लगता, स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा, हम क्या करें, ये लत कैसे छुड़ाएं

सवाल- मैं अजमेर से हूं। मेरा 15 साल का बेटा है। पिछले कुछ समय से उसे ऑनलाइन गेम खेलने की आदत हो गई है। वह रोज घंटों मोबाइल या कंप्यूटर पर गेम खेलता रहता है। हम दोनों वर्किंग हैं। जब वह छोटा था, तब अक्सर उसे मोबाइल पकड़ा देते थे ताकि वो व्यस्त रहे।

स्कूल से भी शिकायत आ रही है कि पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता। परफॉर्मेंस लगातार कमजोर हो रहा है। कुछ बोलो तो गुस्सा हो जाता है। हमें उसकी सेहत, पढ़ाई और भविष्य की चिंता है। बतौर पेरेंट्स हमें क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी चिंता जायज है, लेकिन बतौर काउंसलर सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगी कि खुद को ‘दोषी’ मानना बंद करें। आपने अनजाने में बच्चे को गैजेट्स दिए ताकि आप काम कर सकें। उस समय आपको इसके दुष्परिणामों का पता नहीं था। लेकिन अब उसे गेमिंग की लत लग चुकी है तो समय दोष देने का नहीं, बल्कि ‘डैमेज कंट्रोल’ का है।

आपका बेटा ‘डोपामिन लूप’ में फंसा हुआ है। ऑनलाइन गेम्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि हर लेवल पार करने पर खुशी का एहसास कराने वाला ‘डोपामिन’ हॉर्मोन रिलीज होता है। ऐसे में बच्चों का ऑनलाइन गेम्स की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है। लेकिन जब इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे तो यह चिंता की बात है। सही स्ट्रैटेजी और धैर्य के साथ इस स्थिति को बदला जा सकता है।

बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग की लत क्यों लगती है?

किशोरावस्था में बच्चों का दिमाग तेजी से बदल रहा होता है। इस उम्र में उन्हें रोमांच और उपलब्धि की जरूरत महसूस होती है। ऑनलाइन गेम्स इन सभी जरूरतों को पूरा करते हैं। यही वजह है कि बच्चे उनमें जल्दी उलझ जाते हैं।

इसके अलावा गेम्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि हर मिनट कोई नया रिवॉर्ड, लेवल या चैलेंज मिले। इसलिए बच्चे को बार-बार खेलने की इच्छा होती है। अगर घर में अकेलापन हो या बच्चे के पास समय बिताने के सीमित विकल्प हों तो गेमिंग धीरे-धीरे लत बन जाती है। गेमिंग की लत के कई कारण हो सकते हैं।

ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन का बच्चे पर प्रभाव

पेरेंट्स को लगता है कि ऑनलाइन गेम की लत सिर्फ पढ़ाई को प्रभावित करती है। लेकिन वास्तव में इसका असर बच्चे की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर पड़ता है। जैसेकि-

  • ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों पर प्रेशर पड़ता है।
  • नींद की क्वालिटी खराब होती है।
  • फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है।
  • इससे लंबे समय में मोटापा हो सकता है।
  • थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • बच्चे के स्वभाव में चिड़चिड़ापन हो सकता है।
  • जब उन्हें गेम खेलने से रोका जाता है तो वे गुस्सा या निराशा दिखा सकते हैं।
  • फोकस कम होता है, जिसका असर पढ़ाई और व्यवहार पर पड़ता है।

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