गर्मियों में स्ट्रीट फूड न खाएं:8 हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, अगर खाने की मजबूरी हो तो ये 12 बातें ध्यान रखें

गर्मियों में तापमान बढ़ने से डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। गर्मियों में स्ट्रीट फूड या बाहर का खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
तापमान बढ़ने पर बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनपते हैं। इसलिए इस मौसम में खाना जल्दी खराब होता है। कई बार इसका पता भी नहीं चल पाता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, डायरिया, उल्टी और टाइफाइड हो सकते हैं।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बात करेंगे कि गर्मियों में स्ट्रीट फूड क्यों नहीं खाना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-
- स्ट्रीट फूड खाने से क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
- किन लोगों को स्ट्रीट फूड नहीं खाना चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- क्या गर्मी के मौसम में बाहर का खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है?
जवाब- हां, गर्मियों में तापमान ज्यादा होता है। इसलिए बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनपते हैं। इससे खाना जल्दी खराब होता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। स्ट्रीट फूड या बासी खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। हाइजीन की कमी भी संक्रमण का एक बड़ा कारण है।
सवाल- गर्मी के मौसम में स्ट्रीट फूड क्यों नहीं खाना चाहिए?
जवाब- इसके कई कारण हैं-
- ज्यादा तापमान में खाना जल्दी खराब होता है।
- स्ट्रीट फूड खुले में रहता है, जहां धूल, मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से पहुंच जाते हैं।
- इसे बार-बार गर्म करके परोसा जाता है, जिससे ये अनहेल्दी हो जाता है।
- वेंडर एक ही बर्तन और पानी का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
- एक ही तेल को बार-बार गरम किया जाता है, जो खतरनाक है।
सवाल- क्या ये सच है कि टाइफाइड का एक बड़ा कारण स्ट्रीट फूड है?
जवाब- हां, सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संचयन रॉय बताते हैं कि टाइफाइड ‘साल्मोनेला टाइफी’ नामक बैक्टीरिया से होता है। ये बैक्टीरिया मुख्य रूप से दूषित भोजन-पानी से फैलता है। स्ट्रीट वेंडर हाइजीन का ख्याल नहीं रखते हैं। इसीलिए मई-जून के महीनों में टाइफाइड के केस बढ़ जाते हैं।
सवाल- गर्मियों में बाहर के खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
जवाब- इसके कई कारण हैं-
- हाई टेम्परेचर पर बैक्टीरिया, फंगस तेजी से पनपते हैं।
- साफ-सफाई की कमी, बार-बार गर्म किया हुआ खाना और दूषित पानी का इस्तेमाल फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ाता है।
- धूप में रखे होने से मेयोनीज, सॉस और सलाद में टॉक्सिन्स पैदा हो जाते हैं।
- टॉक्सिन्स शरीर में जाकर इंफेक्शन पैदा करते हैं।
सवाल- क्या गर्मियों में बाहर का खुला पानी पीना सेफ है?
जवाब- बिल्कुल नहीं, क्योंकि इसमें बैक्टी
सवाल- क्या खुले में बन रहा गन्ने का रस पीना सेफ है?
जवाब- गन्ने का रस फायदेमंद है, लेकिन खुले में बिक रहा कोई भी जूस पीना रिस्की हो सकता है। इसके कई कारण हैं-
- गन्ने को ठीक से धोया नहीं जाता, उस पर मिट्टी और कीड़े चिपके हो सकते हैं।
- मशीन में लगा ग्रीस या जंग रस में मिल सकता है।
- इसमें खराब पानी से बनी सस्ती बर्फ यूज होती है।
- रस के आसपास मक्खियां रहती हैं।
- सड़क किनारे उड़ रही डस्ट भी रस में मिलती है।
सवाल- क्या जूस में डाली गई बर्फ सुरक्षित होती है?
जवाब- स्ट्रीट वेंडर ‘कमर्शियल बर्फ’ यूज करते हैं। यह बर्फ फिल्टर्ड पानी से नहीं बनती है। इसमें हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं। यह थ्रोट इन्फेक्शन, टाइफाइड और हेपेटाइटिस का कारण बन सकती है।

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सवाल- गर्मियों में बाजार में बिक रहे कटे फल खाना सेफ है?
जवाब- नहीं। उन फलों पर धूल, मक्खियां बैठती हैं। कटे फल जल्दी खराब होते हैं। हमेशा पूरा फल खरीदें। घर पर ही काटें, बचा हुआ कटा फल पॉली रैप में लपेटकर तुरंत फ्रिज में रखें।
सवाल- गर्मी में बाहर का खाना पेट और पाचन पर कैसे असर डालता है?
जवाब- डॉ. संचयन रॉय बताते हैं कि गर्मियों में डाइजेस्टिव सिस्टम स्लो हो जाता है। बाहर का हैवी, डीप फ्राइड और मसालेदार फूड पचाने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग हो सकती है। साथ ही दूषित भोजन आंतों के गुड बैक्टीरिया को खत्म कर देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है।
सवाल- गर्मी में कौन-से स्ट्रीट फूड ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं?
जवाब- ये स्ट्रीट फूड ज्यादा रिस्की होते हैं-
- गोलगप्पे/पानीपुरी
- दही-भल्ला/चाट
- कटे फल
- खुला जूस/शेक
- बर्फ का गोला/चुस्की
- समोसा/कचौड़ी
सवाल- अगर बाहर खाना मजबूरी हो तो किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब– इसे पॉइंटर्स से समझिए-
सही जगह का चुनाव करें
- साफ-सफाई वाली दुकान चुनें।
- जहां हर सर्विंग के लिए ताजा खाना बनाया जाता हो।
- बहुत सस्ते दाम वाली दुकानों पर न खाएं।
- इसमें क्वालिटी और सेफ्टी से समझौता हो सकता है।
ताजा और गरम खाना खाएं
- लंबे समय से रखा फूड अवॉइड करें।
- बार-बार गर्म किया हुआ फूड न लें।
- ठंडा या बासी फूड खाने से बचें।
फिल्टर्ड पानी पिएं
- केवल सील्ड बोतल का पानी पिएं।
- खुले में रखा पानी यूज न करें।
- वेंडर्स अक्सर खराब पानी से बनी बर्फ यूज करते हैं।
- इसलिए अलग से बर्फ मिलाकर बनने वाले ड्रिंक्स अवॉइड करें।
कच्ची चीजें खाने में सावधानी बरतें
- सलाद और कटी प्याज अक्सर दूषित हो जाती है। इसे न खाएं।
- खुले में बिक रहे कटे फल न लें।
पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें
- खाने से पहले हाथ जरूर साफ करें।
- सैनिटाइजर इस्तेमाल करें।
- हो सके तो साफ चम्मच से खाएं।
पकाने के तरीका देखें
- डीप फ्राइड या बहुत मसालेदार फूड न खाएं।
- बार-बार इस्तेमाल तेल से बना फूड न लें।
- स्टीम्ड या ग्रिल्ड ऑप्शन बेहतर है।
हाई रिस्क फूड न लें
- अधपका नॉन-वेज बिल्कुल न खाएं।
- क्रीम बेस्ड चीजें (मेयो, कस्टर्ड) अवॉइड करें।
- खुले में रखी सॉस/चटनी न लें।
हल्का फूड खाएं
- हल्का और सुपाच्य खाना लें।
- इडली, खिचड़ी, दाल-रोटी बेहतर विकल्प हैं।
टाइमिंग का ख्याल रखें
- लंच या डिनर के टाइम में खाना खाएं।
- इस समय ज्यादा लोग खाते हैं, खाना ताजा मिलता है।
- ऑफ-पीक टाइम में बासी फूड मिल सकता है।
खाने के बाद टहलें
- खाने के बाद थोड़ी देर टहलें।
- खाने के कुछ देर बाद पानी पिएं।
- एक साथ ज्यादा पानी न पिएं।
इमरजेंसी के लिए तैयार रहें
- ट्रैवलिंग के दौरान ORS जरूर रखें।
- डॉक्टर की सलाह से जरूरी दवाएं साथ रखें।
शरीर के संकेत समझें
- खाने के बाद पेट दर्द हो तो सावधान रहें।
- उल्टी या दस्त को नजरअंदाज न करें।
- जरूरत पड़े तो डॉक्टर से सलाह लें।



