सरकारी नौकरी में दो-बच्चों की पाबंदी हटने जा रही है;2 से ज्यादा बच्चे वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी:एमपी में बदलेगा 25 साल पुराना नियम, 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों को मिलेगी राहत

सरकारी नौकरी में दो-बच्चों की पाबंदी हटने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इस पर सहमति बन गई है। इसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके बाद तीसरी संतान होने पर किसी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह प्रतिबंध 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार ने सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर लागू किया था।
नियम बदलने से करीब 30 हजार ऐसे टीचर्स को राहत मिलेगी जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं। अब नियम
क्यों किया जा रहा नियम में बदलाव?
कुछ वर्षों में इस नियम की प्रासंगिकता पर सवाल उठे। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ माना गया। हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने तीन बच्चों पर जोर दिया। इसके बाद बदलाव की प्रक्रिया तेज हुई।
18 फरवरी को लखनऊ में मोहन भागवत ने घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि तीन बच्चों का औसत समाज के अस्तित्व के लिए जरूरी है। जिस समाज में परिवार में तीन बच्चे नहीं होते, वो भविष्य में खत्म हो जाता है। उन्होंने भारत की
5 पॉइंट्स में समझिए फैसले का असर
- कोर्ट और विभागीय स्तर पर लंबित मामलों पर कैबिनेट फैसला करेगी।
- तीसरी संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को कानूनी लड़ाई और तनाव से राहत मिलेगी।
- बर्खास्तगी का डर खत्म होगा, प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित होगी।
- नई भर्तियों में तीन संतान वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- 2001 के बाद बर्खास्त कर्मचारियों के मामले पर भी कैबिनेट निर्णय लेगी।
स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में फैसले का स्वागत हो रहा है। यहां 8-10 हजार मामले लंबित थे। नियम की कठोरता का अंदाजा इस बात से है कि एक न्यायाधीश को भी नौकरी गंवानी पड़ी थी।
राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही हटा चुके हैं पाबंदी
मध्य प्रदेश पहला राज्य नहीं है। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने 11 मई 2016 और छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी हटा दी थी। इन राज्यों में तीन बच्चों वाले कर्मचारी बिना बाधा नौक


