जालौन की रहने वाली नेहा प्रजापति ने शादी से 11 दिन पहले किया सुसाइड:लिखा- मेरे मंगेतर से छोटी बहन की शादी करा देना;

बहन रोली प्रजापति की वजह से सुसाइड कर रही हूं। मुझे मेंटली टॉर्चर करती थी। अपनी शादी के लिए पिता का इलाज नहीं कराया। अगर शादी में जल्दबाजी करने की बजाय कैंसर से जूझ रहे पिता के इलाज पर ध्यान दिया होता तो आज वो हमारे बीच होते। मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरे मरने के बाद छोटी बहन की शादी मेरे मंगेतर से करा दी जाए।

ये बात जालौन की रहने वाली नेहा प्रजापति ने अपने सुसाइड नोट में लिखीं। फिर मंगलवार को घर के किचन में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से मिले सुसाइड लेटर में नेहा ने अपनी बड़ी बहन रोली पर टॉर्चर करने का आरोप लगाया।
पुलिस सूत्रों ने बताया- नेहा चार बहनों में तीसरे नंबर पर थी। दो बड़ी बहनों मीनू (29) और रोली (26) की शादी हो चुकी थी। छोटी बहन रक्षा (18) पढ़ाई कर रही है। रोली की शादी 12 फरवरी को हुई थी। नेहा की शादी की तारीख 14 मार्च को तय थी।
इस बीच पिता की मौत हो गई। तब नेहा को लगता था कि रोली ने अपनी शादी में जल्दबाजी की। उसने पिता के इलाज पर ध्यान नहीं दिया। अगर वो अपनी शादी की बजाय पिता इलाज कराती तो आज वो जिंदा होते। इसे लेकर दोनों में जमकर लड़ाई चल रही थी। मामला कोंच कोतवाली के गोखले नगर का है।

अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझ लीजिए…
- गोखले नगर के रहने वाले अवध बिहारी प्रजापति खेती किसानी करते थे। उनकी चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी मीनू की शादी चार साल पहले इटावा जिले में की थी। पिछले महीने 12 फरवरी को रोली की शादी कानपुर में की थी। तीसरी बेटी की शादी इटावा में मीनू के देवर से होनी थी।
- इस बीच, 25 फरवरी को अवध की कैंसर की बीमारी से मौत हो गई है। पिता की मौत के बाद नेहा गुमसुम रहने लगी। पिता के न होने का जिम्मेदार रोली को मानने लगी। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को नेहा ने रोली से कहा था- तुम्हारी वजह से पापा मर गए। तुमने अपनी शादी तो धूमधाम से कर ली। तुम अगर खेत बेचकर इलाज करा देती तो पापा बच जाते। मेरी भी शादी में रहते।
- इसके बाद दोनों खूब झगड़ा हुआ और नेहा ने देर रात घर के किचन में फांसी लगा ली। सुबह जब घरवाले उठे तो नेहा शव देखा। इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल की जांच की।
अब पढ़िए लेटर में क्या लिखा है-
नेहा ने लिखा- मेरे मरने का कारण मेरी बहन रोली प्रजापति है। मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी। इसी वजह से मैं आत्महत्या करने जा रही हूं। मेरे और डैडी के अकाउंट के पैसे हम दोनों के डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के बाद निकल जाएंगे। इस काम के लिए चंद्रकुआं में जनसेवा केंद्र चलाने वाले राहुल भइया के पास चले जाना।
मेरे अकाउंट में 34000 रुपए हैं और मेरी किताब के नीचे काले पेज का रजिस्टर रखा है। उसमें 14,000 रुपए और हैं। बैंक के और ये मिलाकर 48,000 हो जाएंगे। इसमें से जितने पैसे मंगेतर मास्टर उर्फ अंकित ने डैडी की दवाई और कीमो करवाने के लिए दिए थे, उतने पैसे वापस कर देना। बाकी बचे पैसे में से 20 हजार रुपए घर पर दे देना, जो दीदी ने डैडी के इलाज के लिए दूसरों से लिए थे।
उसके बाद जो पैसे बचे, उनका जैसा उचित समझो वैसा करना। अंकित से कह देना कि ढाई लाख रुपए वापस लौटा दे और वे पैसे रक्षा के नाम ही रहने दे, उसके काम आएंगे। संदूक की चाबी उसी रजिस्टर में है, जिसमें पैसे रखे हैं। संदूक के अंदर एक स्कूल बैग है। उसमें सबसे नीचे वाली चेन में टांड के ऊपर वाली संदूक की चाबी है। सेफ के अंदर की चाबी रक्षा के कॉलेज के बैग में है।
अंकित से कह देना कि मुझे माफ कर दें। जो भी सारी बुकिंग हो चुकी है और चढ़ावा लिया जा चुका है, उसके लिए अंकित और मुस्कान (रक्षा) की शादी करा दे। यह मेरे लिए कहना आसान है, पर करना नहीं। इसके लिए मुझे सभी लोग माफ कर दें।
पुलिस बोली- मामले की जांच कर रहे
सीओ कोंच परमेश्वर प्रसाद ने बताया-
मामले की जांच की जा रही है। जो सुसाइड पर्ची में बातें लिखी गई है। उनके बारे में भी पता लगाया जा रहा है। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फोरेंसिक टीम की मदद से सभी जांच की जा रही है।



