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अपना सलाहकार चुनने से पहले उसके व्यवहार में इन चीज़ों को देखना है बहुत ज़रूरी

जीवन में दोराहे का असमंजस जब भी सामने आता है, किसी की सलाह की ज़रूरत महसूस होती है। सलाह देने वाले का चुनाव बेहद जटिल कार्य है। आपका भविष्य ही नहीं, आपका रवैया, आपकी सोच और आपकी प्रगति सब इस अहम चुनाव से प्रभावित होते हैं।

शिवानी दफ़्तर में पहली बार कोई प्रेज़ेंटेशन दे रही थी। मीटिंग महत्वपूर्ण थी और शिवानी आश्वस्त। प्रेज़ेंटेशन के दौरान एक जगह वो एक आंकड़े पर अटक गई। मीटिंग को वहीं लंच के लिए रोक दिया गया। ऑफिस की ही उसकी अनुभवी दोस्त कविता ने शिवानी को अपनी राय देते हुए कहा कि बॉस तुमसे नाराज़ हैं, तुम्हारे आगे के मौके तो गए समझो। शिवानी बचे हुए प्रेज़ेंटेशन को लेकर निराश हो गई थी कि तभी सामने बॉस खड़े दिखे। उसने पूरी हिम्मत बटोरकर उनसे उनका फीडबैक मांग लिया। उन्होंने सहजता से कहा, ‘मैंने ब्रेक ही इसलिए लिया कि तुम अपना विश्वास बटोरकर आगे का हिस्सा पूरा करो। ग़लती तो सिखाती है, यह हार मानने का कारण नहीं बननी चाहिए।’ शिवानी ने अब सही सलाहकार चुना था।

जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव के समय हमें ऐसे अनुभवी की तलाश होती है जो सही रास्ता दिखा सके। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि एक कुशल सलाहकार, आपकी क्षमताएं पहचानकर उन्हें निखारने का काम करता है। ऐसे में किसी की निकटता या उसके अनुभव को उसकी योग्यता मानकर उसे अपना मार्गदर्शक चुन लेना जीवन में नई नकारात्मकताएं लाने के साथ आपके आत्मविश्वास की जड़ें भी हिला सकता है। वो कोई दोस्त हो, परिजन, सहयोगी या वरिष्ठ, कोई भी, जो आपकी क्षमताओं और सपनों के साथ है, वही सच्चा सलाहकार है। इन मापदंडों को भी जांचें-

सम्मान और सीमाओं का निर्वहन

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