खंडवा में ओबीसी बालक हॉस्टल के वार्डन पर छेड़छाड़ के आरोप लगाने वाली महिला चपरासी को बर्खास्त कर दिया गया

खंडवा में ओबीसी बालक हॉस्टल के वार्डन पर छेड़छाड़ के आरोप लगाने वाली महिला चपरासी को बर्खास्त कर दिया गया हैं। महिला चपरासी दैनिक वेतन भोगी श्रमिक थी। उनसे रातों-रात हॉस्टल का क्वार्टर भी खाली कराया गया। कार्रवाई कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने की है। छात्राओं के वीडियो बनाने को आधार बनाया गया है। वहीं महिला चपरासी ने कहा कि, जब हॉस्टल लड़का का है, तो छात्राएं वहां कैसे आ गई। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
सोमवार देर शाम महिला चपरासी पुष्पा चौहान के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है। कलेक्टर गुप्ता ने सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए है। अपर कलेक्टर काशीराम बडोले ने बताया कि, मामला पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास का है। 5 फरवरी को हॉस्टल के अधीक्षक और छात्राओं ने पुष्पा चौहान के विरुद्ध कार्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता व छात्राओं के कक्ष में बिना अनुमति प्रवेश कर उनके वीडियो बनाने जैसी शिकायतें की थी।
इसी आधार पर जांच के बाद सेवा समाप्ति से जुड़ी कार्रवाई की गई है। पुष्पा चौहान अनाधिकृत रूप से छात्रावास अधीक्षक के कक्ष में निवास कर रही थीं, उसे भी तत्काल खाली करने के निर्देश दिए गए। इधर, पुष्पा चौहान ने आदेश जारी होने के तत्काल बाद हॉस्टल खाली कर दिया। उन्होंने इसी हफ्ते 21 फरवरी को पुलिस से शिकायत कर छात्रावास अधीक्षक संजय फरकले के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
झूठा फंसाया गया, कमिश्नर और हाईकोर्ट जाऊंगी
मामले में बर्खास्त की गई चपरासी पुष्पा चौहान का कहना है कि, सारे आरोप मनगंढत है। वह बालक हॉस्टल में पदस्थ थी। वार्डन ने झूठी शिकायतें करके एक हफ्ते पहले ही गर्ल्स हॉस्टल में ट्रांसफर करवाया था। जो कार्रवाई हुई है, वह बालक हॉस्टल से जुड़ी है। प्रशासन बताए कि बालक हॉस्टल में छात्राओं के वीडियो कैसे बनेंगे। मैंने पुलिस से छेड़छाड़ की शिकायत की थी, उस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। अधीक्षक फरकले के साथ विभाग की सुनिता मुवेल और सारे अधिकारी मिले हुए है। मामले में कमिश्नर और फिर हाईकोर्ट के समक्ष जाऊंगी।
टीचर पति की हादसे में मौत के बाद मिली थी नौकरी
जानकारी के मुताबिक, पुष्पा चौहान के पति टीचर थे, बिजली का करंट लगने से उनके पति और बेटी की मौत हो गई थी। यह घटना करीब 10 साल पहले की है। उसके बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए पुष्पा चौहान के पास शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। इसके चलते उन्हें चपरासी के पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में नौकरी दी गई। उनका एक बेटा है, जिसकी पढ़ाई-लिखाई के लिए उन्होंने शहर आकर नौकरी ज्वाइन की थी।
टाइमलाइन… ऐसे चला शिकायतों का सिलसिला
पुष्पा चौहान के अनुसार, पति की मौत 2016 में हुई थी। 3 साल तक घर रही, उसके बाद दैनिक वेतन भोगी के रूप में 2019 से पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में नौकरी मिली। पिछले साल छात्रावास में एक बच्चे का फर्जी तरीके से एडमिशन हो गया। मैंने आवाज उठाई तो दूसरे छात्रावास में अटैच कर दिया गया। फिर मैंने लिखित शिकायत की तो फर्जी एडमिशन की पोल खुल गई। इसके बाद वापस बालक छात्रावास में भेजा गया।
जिस निरीक्षणकर्ता अधिकारी सुनिता मुवेल की उस समय शिकायत की थी, आज वह सहायक संचालक बन गई हैं। अब उसने छात्रावास अधीक्षक के साथ मिलकर मुझे हटाने के लिए पिछले 15 दिन में 10 से ज्यादा शिकायतें कलेक्टर तक भिजवाई। जांच भी उसी सुनिता मुवेल ने की। उसके बाद अब मुझे हटाया गया हैं। इधर, बिना प्रतिनियुक्ति के एक साल से नौकरी पर वार्डन
शहर के अशोकनगर स्थित ओबीसी बालक छात्रावास के अधीक्षक संजय फरकले पर आरोप है कि, वे नियम विरूद्व नौकरी कर रहे है। उनकी सैलरी जनजातीय कार्य विभाग से निकल रही है। जबकि वे पिछड़ा वर्ग विभाग में पदस्थ है। पिछड़ा वर्ग विभाग में उनकी पदस्थी बिना प्रतिनियुक्ति के हो गई है। नियम यह है कि, यदि किसी विभाग का व्यक्ति दूसरे विभाग में नौकरी करता है तो वह प्रतिनियुक्ति पर जाता है। लेकिन अधीक्षक संजय फरकले पिछले एक साल से बिना प्रतिनियुक्ति के ही नौकरी कर रहे है।


