‘बेटी का मर्डर प्री प्लान,पीयूष के पिता को पता था’:इंदौर में होने के बावजूद जरूरी काम बताकर मिलने से कर दिया इंकार

इंदौर के द्वारकापुरी में हुए हत्याकांड के आरोपी पीयूष धामनोदिया को सेंट्रल जेल भेज दिया है। उसे सीधे कोर्ट में पेश न करते हुए वहीं आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए। पुलिस ने लोगों के आक्रोश को देखते हुए उसकी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती।
एसीपी शिवेंद्र जोशी और टीआई मनीष मिश्रा बुधवार को अपनी टीम के साथ आरोपी पीयूष धामनोदिया को जिला कोर्ट लेकर पहुंचे थे। यहां कमिश्नर कार्यालय के पास बनी पार्किंग में उसे पुलिस जीप में ही रखा गया।
लोगों के आक्रोश और मौजूद मीडिया कवरेज के चलते कोर्ट परिसर में इंतजार चलता रहा, लेकिन दोनों अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद पीयूष को लंबे समय तक कोर्ट में पेश नहीं किया गया और अचानक जेल भेज दिया गया।
वहीं, बताया जा रहा है कि हत्याकांड के दिन पीयूष के पिता इंदौर आए थे और बेटे को कॉल भी किया था, लेकिन वे उससे मिल नहीं पाए। हालांकि पंढरीनाथ पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज होने के अगले दिन उनके थाने में बयान लिए थे, लेकिन वे छात्रा के पिता से नहीं मिले।

हत्याकांड प्री-प्लान होने का आरोप
इस हत्याकांड को लेकर एमबीए छात्रा के पिता ने पुलिस कार्रवाई पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले को प्री-प्लान बताया है। उनका कहना है कि 10 फरवरी को पीयूष ने उनकी बेटी की हत्या की थी। उसी दिन पीयूष के पिता प्रहलाद भी इंदौर आए थे।
उन्होंने पीयूष से मिलने और साथ खाना खाने की बात कही थी, लेकिन इंदौर पहुंचने पर पीयूष ने काफी देर तक उनका कॉल नहीं उठाया। बाद में कॉल रिसीव कर उसने कहा कि वह काम में व्यस्त है और मिल नहीं पाएगा। इसके बाद पिता प्रहलाद बिना मिले ही मंदसौर लौट गए।
इस बात का खुलासा तब हुआ, जब छात्रा के पिता कॉलेज पहुंचे और स्टाफ के सामने पीयूष के पिता से बातचीत हुई। छात्रा के पिता को आशंका है कि हत्या की जानकारी पीयूष के पिता को भी थी।
इसके अलावा 12 फरवरी को पंढरीनाथ थाने में प्रधान आरक्षक गोकुल मालवीय ने सुबह जल्दी बयान लेकर पीयूष के पिता को रवाना कर दिया।

पढ़ाई, सोशल मीडिया और भागने की समझ
पुलिस बार-बार पीयूष के व्यवहार का हवाला देकर उससे दूरी बनाए रखने की बात कहती रही, लेकिन छात्रा के पिता का कहना है कि आरोपी पढ़ाई करने के साथ-साथ सोशल मीडिया का नियमित उपयोग कर रहा था। हत्याकांड के बाद उसे भागने की पूरी समझ थी। मुंबई में भी उसे संबंधित थाना क्षेत्र की जानकारी थी।
उनका कहना है कि जिसकी मानसिक स्थिति ठीक न हो, वह यह सब नहीं कर सकता। आरोपी के मोबाइल में अंतिम समय में कई नंबरों पर बातचीत के रिकॉर्ड हैं। पुलिस को उसकी कॉल डिटेल के साथ सोशल मीडिया चैटिंग की भी जांच करनी चाहिए।
हालांकि यह भी चर्चा में है कि इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के कार्यकाल में इतना गंभीर अपराध करने वाला आरोपी पहली बार बिना किसी हिंसा के सीधे जेल पहुंचा है। इसके बावजूद पुलिस सुरक्षा कारणों से उसे कोर्ट में पेश नहीं कर सकी।


