सीएम के विरोध पर नाबालिग को जेल…12वीं की परीक्षा छूटी:छात्र बोला- काले झंडे दिखाने पर गुस्साए कलेक्टर; डंडे से पीटा, रातभर बंद रखा

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां 17 साल 8 महीने 19 दिन उम्र के छात्र को वयस्क मानकर जेल भेज दिया गया। इसके कारण छात्र मंगलवार को 12वीं बोर्ड की अंग्रेजी विषय की परीक्षा नहीं दे सका।
मामले की शुरुआत 8 फरवरी को हुई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धनपुरी में वाटर पार्क के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने शहडोल आए थे। दोपहर करीब 2 बजे मुख्यमंत्री का काफिला गोपालपुर तिराहे से लालपुर हवाई पट्टी की ओर जा रहा था। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की।
कांग्रेस के इस प्रदर्शन की पूर्व सूचना पुलिस के पास नहीं थी। पर्याप्त फोर्स नहीं होने से कुछ देर के लिए सीएम के काफिले के पास अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। स्थिति बिगड़ती देख पीछे से आ रहे शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह गाड़ी से उतर आए। कलेक्टर ने लाठी लेकर कांग्रेसियों को खदेड़ा।
40 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, 37 को जमानत दी मुख्यमंत्री के निकल जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। धारा 151 के तहत रात करीब 8 बजे सभी को बुढार तहसीलदार सुमित कुमार गुर्जर के सामने पेश किया गया। 37 लोगों को सशर्त जमानत मिल गई, लेकिन तीन को जमानत नहीं दी गई। इनमें नाबालिग छात्र भी शामिल था।

रात 10 बजे नाबालिग समेत तीन को भेज दिया गया जेल पुलिस रात करीब 10 बजे तीनों को बुढार जेल ले गई। यहीं सबसे गंभीर चूक हुई, क्योंकि कानून के अनुसार नाबालिग को वयस्कों की जेल में नहीं रखा जा सकता है।
परिजन का आरोप है कि यदि उसी समय छात्र की उम्र जांच ली जाती, तो यह स्थिति ही पैदा नहीं होती।
एक को जमानत देने पर सहमति, दो को देने से इनकार छात्र की पैरवी कर रहे एडवोकेट प्रदीप सिंह के मुताबिक, सोमवार को परिजन जमानत के लिए दोबारा तहसीलदार सुमित सिंह गुर्जर के पास पहुंचे। आरोप है कि तहसीलदार ने स्पष्ट निर्णय लेने के बजाय टालमटोल की। देर शाम कहा गया कि एक आरोपी को जमानत मिल सकती है, बाकी दो पर कल विचार होगा।
परिजन ने इस पर नाराजगी जताई और तीनों की एक साथ जमानत की मांग पर अड़ गए। इसके बाद तहसीलदार ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

दस्तावेजों की जांच में नाबालिग साबित हुआ छात्र परिजन ने तहसीलदार को बताया कि हिरासत में लिया गया छात्र नाबालिग है और अगले दिन मंगलवार को उसकी कक्षा 12वीं की अंग्रेजी की बोर्ड परीक्षा है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें छात्र की जन्मतिथि 22 मई 2008 पाई गई। वह कानूनन नाबालिग साबित हो गया।
इस पर तहसीलदार ने अपनी चूक स्वीकार करते हुए रात में ही नाबालिग को जमानत देने की सहमति जताई, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
मंगलवार सुबह रिहा किया, लेकिन परीक्षा नहीं दे पाया एडवोकेट प्रदीप सिंह के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 7 बजे नाबालिग छात्र को रिहा कर दिया गया। उसकी परीक्षा सुबह 9 बजे से थी। जेल से छूटने, घर पहुंचने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बीच समय इतना कम मिला कि छात्र परीक्षा नहीं दे सका।
एसपी ने कहा- गिरफ्तार लोगों के बताए अनुसार दस्तावेज बनाए जेल प्रशासन ने कहा कि तहसीलदार का कॉल आने के बाद मंगलवार सुबह छात्र को छोड़ दिया गया था।
एसपी रामजी श्रीवास्तव ने कहा- मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान बाधा डालने वाले तीन व्यक्तियों को मौके से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों द्वारा बताए गए नाम और उम्र के आधार पर दस्तावेज तैयार कर उन्हें कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने का आदेश दिया गया था।
आईजी बोलीं- उम्र समझ में नहीं आई, वैधानिक कार्रवाई करेंगे वहीं, शहडोल जोन की आईजी चैत्रा एन ने कहा- उपद्रव करने वाली भीड़ में यह लड़का भी शामिल था। गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र स्पष्ट नहीं हो पाई। बाद में उसके 18 साल से कम होने की पुष्टि हुई है। अब मामले में कानून के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
13 फरवरी को पीड़ित से मिलने शहडोल जाएंगे पीसीसी चीफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि वे पी


