अघोषित रूप से एयरपोर्ट में प्रतिबंध; टैक्सी माफिया की मनमानी, यात्री हो रहे परेशान

जबलपुर एयरपोर्ट में यात्री सुविधाओं में सुधार हो रहा है। सर्वे में रैंक सातवें पायदान पर आ गई है, लेकिन टैक्सी सुविधा को लेकर यात्रियों की परेशानी कम नहीं हो रही। पुलिस ने यात्री फीडबैक से लेकर शिकायत नंबर तक जारी किए, परंतु टैक्सी माफिया की मनमानी नहीं थमी।
निजी टैक्सी संचालकों की तुलना में ओला, ऊबर व रैपिडो का किराया कम है। परंतु एयरपोर्ट में सक्रिय टैक्सी माफिया कम दर पर उपलब्ध सुविधा की राह में रोड़ा बन गए हैं। किसी अन्य टैक्सी के एयरपोर्ट में प्रवेश करने पर ये टैक्सी माफिया चालक के साथ मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।

अघोषित रूप से एयरपोर्ट में प्रतिबंध है
यही कारण है कि इन कंपनियों से जुड़े चालक एयरपोर्ट के लिए टैक्सी सुविधा यात्रियों को नहीं दे पा रहे हैं। पुलिस, परिवहन विभाग, एयरपोर्ट प्रशासन की सख्ती के बाद भी टैक्सी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के वाहन अघोषित रूप से एयरपोर्ट में प्रतिबंध हैं।
पीटते हैं टैक्सी चालक को
टैक्सी चालक ने यात्री को बताया कि यदि सवारी एयरपोर्ट के अंदर से ली तो टैक्सी चालक को यहां के स्थानीय टैक्सी चालक मिलकर पीटते हैं। उनके भय की वजह से कोई भी गाड़ी वाला यहां आना नहीं चाहता है। यात्री ने अपने कड़वे अनुभव इंटरनेट में साझा करते हुए लिखा कि यह साफ है कि एयरपोर्ट में टैक्सी माफिया की खुली लूट चल रही है।
एयरपोर्ट में टैक्सी माफिया के खिलाफ पूर्व में अंकुश लगाने का दावा किया था। जिला प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने किराया सूची सार्वजनिक की थी ताकि नियत किराया यात्री से लिया जाए। ओला, उबर और रैपिडो के अलावा निजी टैक्सी को सवारी लेने-देने के लिए टैक्सी संचालकों को समझाइश दी गई थी।
कुछ दिन सब ठीक चला, लेकिन हालात फिर वैसे ही हो गए है। एयरपोर्ट प्रबंधन इन समस्या से अनजान बनकर शिकायत मिलने का इंतजार कर रहा है।
क्यूआर कोड बेस शिकायत भी बेकार
एयरपोर्ट प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ने एयरपोर्ट परिसर में कुछ दिन पहले क्यूआर कोड बेस शिकायत की ऑनलाइन सुविधा दी थी। इसमें अभी तक एक-दो शिकायत ही मिली है। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि शिकायत जब तक नहीं मिलेगी कैसे कार्रवाई की जा सकती है।



