जबलपुरमध्य प्रदेश

दूषित खाना खाने से हॉस्टल में छात्र की मौत,लापरवाही पर एफआईआर दर्ज

कुंडम के हरदुली आदिवासी छात्रावास में अमानक भोजन परोसा गया था। जिसके कारण छात्रावासी छात्रों का स्वास्थ्य खराब हुआ और एक छात्र की मौत हो गई। यह जानकारी छात्र राजाराम धुर्वे (14) की मौत के बाद की गई जांच में सामने आई है। वह कक्षा नवमीं छात्र था, छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। असामान्य परिस्थिति में मौत होने पर पुलिस ने छात्र के बिसरा की जांच कराई थी।

छानबीन में छात्रों को घटिया खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाने में आरंभिक रूप से छात्रावास अधीक्षक की लापरवाही मिली है। कुंडम पुलिस ने आरोपित छात्रावास अधीक्षक गजेंद्र झारिया के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है।

नमूने में मिली खराबी, फोरेंसिक जांच कराई

घटना संदिग्ध होने पर पुलिस ने छात्र राजाराम के शव का पोस्टमार्टम कराया। उसके बिसरे की क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से जांच कराई। जांच में विषाक्त भोजन से छात्र की मौत की बात सामने आई। एक साथ 13 छात्रों का स्वास्थ्य खराब होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग के एक दल ने भी छात्रावास का निरीक्षण किया था। छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन निर्माण में उपयोग की जाने वाली खाद्य सामग्रियों के नमूने जब्त किए थे। चावल, दाल, आटा एवं कुछ अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता जांच में निम्न स्तर की पायी गई थी।

13 छात्रों का अचानक बिगड़ा था स्वास्थ्य

हरदुली के आदिवासी छात्रावास में कुंडम के आसपास के गांव के कई छात्र रहकर पढ़ाई करते हैं। गत वर्ष 20 अगस्त को छात्रावास में परोसे गए भोजन को खाने के बाद कुछ छात्रों का स्वास्थ्य खराब हो गया। सूचना पर स्वजन आकर छात्रों को घर ले गए, लेकिन तबियत बिगड़ने पर 13 छात्रों को प्रारंभिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। राजाराम धुर्वे (14) की स्थिति गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पूर्व छात्र की मौत हो गई थी।

अधीक्षक लाते थे सामग्री

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन निर्माण के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री अधीक्षक गजेंद्र झारिया लाते थे। कर्मचारी यदि गुणवत्ता पर संदेह जताते तो अधीक्षक उन पर दबाव बनाते थे। उसी सामग्री से छात्रों का भोजन तैयार करवाते थे। पूछताछ में सामने आया है कि घटना से लगभग एक माह पूर्व ही गजेंद्र की छात्रावास में पदस्थापना हुई थी, लेकिन वह नियमित रुप से छात्रावास में नहीं रहते थे।

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