4 लाख रिश्वत लेते क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर अरेस्ट:मेरठ में एंटी करप्शन टीम को पहले हड़काया, फिर मुंह छिपाता रहा
मेरठ में इंस्पेक्टर को 4 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है। एंटी करप्शन टीम जब उसे गाड़ी में बैठाने लगी तो वह हेकड़ी दिखाने लगा। टीम को हड़काया और मामला सेटल करने को कहा, लेकिन टीम ने उसकी एक न सुनी। इसके बाद वह मुंह छिपाता रहा।
इंस्पेक्टर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह हाथ से अपना मुंह ढकता है। फिर हाथ हटा लेता है, लेकिन रौबदार स्टाइल में चलता है। एंटी करप्शन टीम इंस्पेक्टर को कंकरखेड़ा थाने लेकर पहुंची। यहां उससे पूछताछ की जा रही है।
आरोपी इंस्पेक्टर का नाम महेंद्र कुमार है। अभी वह हापुड़ में क्राइम ब्रांच में तैनात है। इंस्पेक्टर का परिवार मेरठ में ही रहता है।
पुलिस ने बताया कि इंस्पेक्टर युवक को परेशान कर रहा था। उससे 4 लाख रुपए मांग रहा था। इसके बाद युवक ने एंटी करप्शन में शिकायत कर दी। मामला सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई।
टीम ने पीड़ित को केमिकल लगे 4 लाख रुपए दिए। उसे इंस्पेक्टर के बताए गए स्थान रोहटा रोड स्थित संगम टावर के पास भेजा गया। जैसे ही पीड़ित ने इंस्पेक्टर को रुपए दिए, टीम ने तुरंत दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
हापुड़ एसपी केजी सिंह ने बताया-
इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया है। मामले से जुड़ी रिपोर्ट आने पर ही पूरे मामले का पता चल सकेगा। इंटरनल जांच कराई जाएगी। अभी स्थानीय स्तर से जुड़ी कोई शिकायत सामने नहीं आई है।


अब जानिए पूरा मामला….
लोकेश के पास थी एक रिकॉर्डिंग डिवाइस लोकेश जूते के डिब्बे में 4 लाख रुपए रखकर रोहटा रोड पहुंचे। इंस्पेक्टर अपनी गाड़ी में बैठे थे। गाड़ी के अंदर जाने के बाद लोकेश ने उन्हें वह बॉक्स थमा दिया। लोकेश ने रुपए गिरने की बात कही, लेकिन इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने मना कर दिया।
एंटी करप्शन टीम ने लोकेश के साथ अपना एक आदमी भेजा था। गाड़ी में वह आदमी भी लोकेश के साथ बैठा था, जो पूरी घटना को कैप्चर कर रहा था। खुद लोकेश के सीने पर भी एक डिवाइस लगी थी, जिसमें यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो रही थी। महेंद्र सिंह ने जब नोट गिनने से मना किया तो टीम अलर्ट हो गई, तभी एंटी करप्शन की टीम ने महेंद्र को दबोच लिया।
इंस्पेक्टर रिश्वत क्यों ले रहा था बागपत जिले के खेकड़ा थाना क्षेत्र के गोठरा गांव के रहने वाले दारा सिंह, मनोज और अजय पाल के खिलाफ रिछपाल नाम के व्यक्ति की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। शुरू से ही तीनों अपने आप को निर्दोष बताते आ रहे थे।
जब छानबीन शुरू हुई तो पुलिस को भी सबूत मिलने लगे कि तीनों निर्दोष हैं। इस मुकदमे के शिकायतकर्ता जगदीश ने मामला हाथ से निकलता देख अफसर से शिकायत की और केस को हापुड़ क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर करा लिया।
4 साल में ढाई लाख रुपए लिए हापुड़ क्राइम ब्रांच से इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह इस मुकदमे की जांच कर रहे थे। उन्होंने तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ 82 की कार्रवाई भी करा दी। घरों पर नोटिस भी चस्पा कर दिया। वह आरोपी पक्ष पर लगातार दबाव बना रहे थे।
महेंद्र सिंह 4 साल से इस केस की जांच कर रहे थे। वह मुकदमे की पैरवी कर रहे लोकेश को बार-बार कुर्की कराने की धमकी देते थे। लोकेश की माने तो वह अभी तक लगभग ढाई लाख रुपया इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह को दे चुके थे।
आरोपी दारा सिंह और उनका भतीजा लोकेश (32) मुकदमे की मजबूत पैरवी कर रहे थे। इसी के चलते इस मुकदमे को कुछ महीने पहले 306 में बदल दिया गया। महेंद्र सिंह को जब यह एहसास हो गया कि अब मुकदमा हल्का हो गया है, तो उन्होंने आरोपी पक्ष की पैरवी कर रहे लोकेश से बातचीत की। इंस्पेक्टर ने लोकेश को मुकदमे से दो लोगों के नाम निकालने का भरोसा दिलाया।
इसके एवज में इंस्पेक्टर महेंद्र ने 4 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। रुपए के लिए उसने लोकेश पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। तीन दिन पहले लोकेश ने परेशान होकर इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह की एंटी करप्शन डिपार्टमेंट में शिकायत कर दी। जिसके बाद आरोपी इंस्पेक्टर को रंगे हाथ पकड़ा गया।
हापुड़ में 2021 से तैनात महेंद्र कुमार हापुड़ में साल 2021 से तैनात है। हापुड़ के हाफिजपुर, बहादुरगढ़, सिंभावली, कपूरपूर, कोतवाली देहात और कोतवाली गढ़, बाबूगढ़ में थाना प्रभारी रहे हैं। अभी वह DCRB में शाखा प्रभारी था।
वहीं, हापुड़ पुलिस ने भी इंस्पेक्टर से जुड़े मामलों की जांच शुरू कर दी है। कहीं और किसी मामले में तो रिश्वत लेकर उन्होंने गड़बड़ी नहीं की।
