
झारखंड हाईकोर्ट ने रांची नगर निगम में भवन का नक्शा पास करने की प्रक्रिया में अनियमितता पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने पथ निर्माण विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए दोनों इंजीनियरों को टाउन प्लानर का कार्य करने से तत्काल रोक लगा दी है।
नगर निगम को निर्देश दिया है कि भवन नक्शा पास करने की जिम्मेदारी केवल नियमित रूप से नियुक्त सहायक टाउन प्लानर को ही सौंपी जाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना निर्धारित योग्यता और अनुभव वाले इंजीनियरों से टाउन प्लानर का काम कराना न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे अब तक स्वीकृत भवन नक्शों की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। प्रार्थी धनंजय पी रायपत की ओर से बताया गया कि भवन निर्माण में हुए विचलन को नियमित कराने के लिए 22 जुलाई 2016 को आवेदन दिया गया था, लेकिन इतने वर्षों बाद भी नगर निगम ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।
अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए निगम से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आवेदन को इतने लंबे समय तक लंबित रखने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है।
मंत्री से मंजूरी लेने पर कोर्ट सख्त नगर विकास विभाग के सचिव ने अदालत को बताया कि सहायक टाउन प्लानर को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति के लिए विभागीय मंत्री की मंजूरी ली जा रही है। इस पर कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि जब विधानसभा द्वारा कानून बनाया जा चुका है। राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, तब उसके क्रियान्वयन में किसी मंत्री, यहां तक कि मुख्यमंत्री या राज्यपाल को भी बाधा डालने का अधिकार नहीं है। मंत्री से मंजूरी लेना कानून के शासन के विरुद्ध है। प्रशासक ने पूर्व में दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया, जो अवमानना की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने इस मामले में नगर विकास के सचिव को नोटिस जारी किया है।



