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चंदेरी कपड़े पर बनी सोने की साड़ी मध्य प्रदेश में मचा रही धूम 

सोने की साड़ी बनी आकर्षण का केन्द्र

स्टार इंडिया न्यूज प्रतिनिधि। जयपुर के जवाहर कला केंद्र स्थित शिल्पग्राम में मध्य प्रदेश सरकार की और से मृगनयनी प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें सोने की साडी लोगो को अपनी तरफ आकर्षित कर रही है. चंदेरी कपड़े पर सोने की नक्काशी राजा महाराजाओं के समय से ही की जाती आ रही है, जो आज भी जारी है.जयपुर के जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में आयोजित मध्य प्रदेश सरकार की मृगनयनी प्रदर्शनी में सोने की साड़ी बनी आकर्षण का केन्द्र, प्रदेश के कलाकार अपनी कारीगरी का लोहा विदेशों में भी मनवा रहे हैं. बात चाहे मूर्तिकला, हस्तकला, चित्रकारी सहित अन्य कला की हो, आज भी कई कारीगर ऐसे हैं जो अपने पुरखों के काम को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं और उसे अपनी आजीविका का साधन बना रहे हैं. ऐसे ही कलाकार देशभर में अलग-अलग काम कर पुरानी विधाओं को आज भी जीवंत किए हुए हैं. मूर्ति जेवरात सहित कई वस्तुएं सोने की धातु से बनी देखी होगी, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश में बनने वाली विशेष साड़ी की.मध्यप्रदेश में आज भी कई कारीगर ऐसे हैं जो राजा महाराजाओं के समय से ही चंदेरी कपड़े पर सोने की नक्काशी कर साड़ी तैयार करते हैं. चंदेरी कपड़े पर सोने की नक्काशी राजा महाराजाओं के समय से ही की जाती आ रही है, जो आज भी जारी है. ऐसे में गुलाबी नगरी आयोजित मृगनयनी प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश से भी कई ऐसे कलाकार आए हुए हैं. इन्हीं में से एक है लालाराम अहीरवाल बुनकर जिन्होंने साड़ी पर सोने के तार से नक्काशी कर उसे खूबसूरत बनाया

लालाराम ने बताया सोने के तार से तैयार की जाने वाली साड़ी बनने में कम से कम 4 से 5 महीने का समय लगता है, तब जाकर एक साड़ी तैयार हो पाती है. यह साड़ी सोने के महीन तारों से तैयार की जाती है. एक साड़ी की कीमत 50 हजार से शुरू होकर कई लाख रुपए तक पहुंचती है, साड़ी में जितना सोना लगता है उस साड़ी की कीमत उस हिसाब से तय की जाती है. सोने के तारों की नक्काशी का काम सिल्क और मस्लीन कपड़े पर किया जाता है. एक साड़ी का वजन 350 ग्राम से लेकर 1 किलो से भी ज्यादा का होता है. आज के टेक्सटाइल दौर में साड़ी पर नक्काशी करना बड़ा ही कठिन काम है, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी इस कार्य को आगे बढ़ा कर वह कला और संस्कृति दोनों को ही बचाए हुए है

इसी के साथ मलमली, लीलन, सिल्क के कपड़े पर ऑर्गेनिक कलर से पेंटिंग करी हुई साड़ियां भी प्रदर्शनी में हैं. मध्यप्रदेश हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम के प्रभारी मोहनलाल ने बताया मध्यप्रदेश की साड़ियां देशभर में धूम मचाती हैं. मध्यप्रदेश ही एक ऐसा प्रदेश है जहां पर ऑर्गेनिक कलर से साड़ियों पर पेंटिंग की जाती है, यह पेंटिंग भी राजा महाराजाओं के समय से की जा रही है. पेंटिंग की हुई साड़ियों की कीमत 5 हज़ार रुपये से शुरू होकर लाखों रुपए तक बिकती है. साड़ी पर सोने और ऑर्गेनिक कलर के इस्तेमाल के लिए मध्यप्रदेश के हस्तकला हथकरघा निगम को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. मध्य प्रदेश सरकार ऐसे कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए नए प्रयास भी कर रही है. जिससे हस्तकला के कलाकार अपनी इस कला को जीवित रख सके और अपनी आजीविका का साधन लुप्त होती विधा को बचाएं, जिस से आने वाली पीढ़ियां भी कुछ सीख ले सके |

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