जबलपुरमध्य प्रदेश
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विहिप-बजरंग दल का आरोप-जबलपुर में सरकारी जमीन पर रोहिंग्या-बांग्लादेशियों का कब्जा, फर्जी दस्तावेजों पर रह रहे लोग

जिला प्रशासन ने डेरे में रह रहे 200 से अधिक लोगों को नोटिस देकर सरकारी जमीन खाली करने के निर्देश दिए

जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर हिनोतिया गांव में सालों से रोहिंग्या , बांग्लादेशी रह रहे है। इतना ही नहीं एक, एक व्यक्ति के पास कई आधार कार्ड भी है, इनके खिलाफ अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो मजबूर होकर हमें आगे आना पड़ेगा और उनके डेरे को उखाड़ फेंकेंगे।

ये कहना है विश्व हिंदू परिषद के विभाग प्रमुख सुमित सिंह ठाकुर का। इधर जिला प्रशासन ने डेरे में रह रहे 200 से अधिक लोगों को नोटिस देकर सरकारी जमीन खाली करने के निर्देश दिए हैं।

एसआईआर के लिए गए अधिकारियों को नहीं दी जानकारी

दरअसल एसआईआर को लेकर जब बरेला के हिनोतिया गांव में बीएलओ घूम रहे थे, तब उन्हें पता चला कि करीब 200 से अधिक लोग गांव के बाहर रह रहे है। बीएलओ की टीम जब वहां पहुंची तो उन्होंने दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया। भनक हिंदूवादी संगठन को लगी तो वे बड़ी संख्या में बरेला थाने पहुंचे और गांव के बाहर डेरा लगाकर रह रहे लोगों को रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताते हुए कार्रवाई की मांग की। नेताओं का आरोप है कि झोपड़े में सारी सुख सुविधा लग्जरी कार रखे हुए है, ये दिखा रहा है कि इन्हें पास कहीं बाहर से पैसा आ रहा है। विभाग प्रमुख सुमित सिंह ठाकुर का कहना है, कि उनकी बोली बांग्लादेशी, रोहिंग्या जैसी है।

अलग- अलग जिलों के दस्तावेज मिले

संगठन का दावा है कि हिनोतिया गांव में 200 से अधिक संदिग्ध लंबे समय से रह रहे हैं, जिनमें से कई के पास तीन-तीन वोटर आईडी और अलग-अलग जिलों के दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या मूल के हो सकते हैं, जिनकी नागरिकता और पहचान संदिग्ध है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ये लोग सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा रहे हैं, जिससे सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है।

विहिप ने दी आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के साथ संगठनों ने पुलिस को कुछ दस्तावेज और सबूत भी उपलब्ध कराए हैं, जिनमें कथित फर्जी वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र शामिल हैं। संगठन ने गांव के सरपंच पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरपंच ने कथित रूप से इन लोगों को सरकारी भूमि पर बसाया है और स्थानीय स्तर पर उन्हें संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। सरकारी जमीन पर बनाए गए अस्थाई डेरों में ऐसे लोग रह रहे हैं जिनकी पहचान स्पष्ट नहीं है, संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। विहिप, बजरंग दल ने जिला प्रशासन को 27 नवंबर तक इन अवैध कब्जों पर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है। यदि तय समय सीमा तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती है, तो वे स्वयं आंदोलन शुरू कर इन डेरों को हटाने का कदम उठाएंगे।

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