नई दिल्ली: बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने वित्तीय अनियमितताओं के हालिया आरोपों और चल रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच का हवाला देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
3 जुलाई को दाखिल की गई जनहित याचिका (पीआईएल) में स्पष्ट किया गया है कि याचिका राम मंदिर के धार्मिक कामकाज पर सवाल नहीं उठाती और न ही उसके अनुष्ठानों में किसी हस्तक्षेप की मांग करती है। इसके बजाय, यह पूरी तरह ट्रस्ट के वित्तीय प्रशासन पर केंद्रित है, यह तर्क देते हुए कि वर्षों से मिले भारी मात्रा में सार्वजनिक दान को देखते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।
शीर्ष अदालत के समक्ष की गई प्रमुख मांगों में से एक है सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में चल रही जांच को राज्य पुलिस से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करना। याचिकाकर्ता ने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वित्तीय विशेषज्ञों वाली एक अस्थायी अदालत-निगरानी वाली निगरानी समिति के गठन की भी मांग की है।
याचिका में अदालत से यह निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है कि बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल लेनदेन लॉग, यूपीआई रिकॉर्ड और लेखांकन दस्तावेजों सहित सभी वित्तीय रिकॉर्ड संरक्षित किए जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी भी सबूत में बदलाव न हो सके।
इसके अलावा याचिका में एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा ट्रस्ट के खातों, दान, बैंक लेनदेन और संपत्तियों का व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसमें ट्रस्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण तथा दान और व्यय का ब्योरा प्रकाशित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है, ताकि अधिक वित्तीय पारदर्शिता के जरिए जनता का विश्वास मजबूत हो।
एक अंतरिम उपाय के रूप में याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को प्रस्तावित अदालत-निगरानी वाली समिति की मंजूरी के बिना बड़े वित्तीय या प्रशासनिक निर्णय लेने—जिसमें बड़े ठेके देना, महत्वपूर्ण निवेश करना या तीसरे पक्ष के अधिकार बनाना शामिल है—से रोका जाए।
इस सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर से जुड़े दान के कथित गबन की अदालत-निगरानी वाली जांच की मांग करने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था। यह मौजूदा याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जसवंती ए. के माध्यम से दाखिल की गई है।
याचिका में उल्लिखित आरोपों पर अभी सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना बाकी है और इस चरण पर ट्रस्ट के खिलाफ कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया है।


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