देहरादून | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बार-बार होने वाले परीक्षा पेपर लीक को लेकर केंद्र और उत्तराखंड सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि "भारत के युवाओं के भविष्य की चोरी" है।
देहरादून में छात्रों की गूंज अभियान के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि लाखों युवा अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिताते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कारण उनकी कड़ी मेहनत बर्बाद हो जाती है।
"यह केवल पेपर लीक नहीं है; यह हमारे युवाओं के भविष्य की चोरी है," राहुल गांधी ने छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा विवादों ने देश की भर्ती और शिक्षा प्रणालियों में जनता के विश्वास को कमजोर कर दिया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बेरोजगारी पहले से ही युवा भारतीयों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है, और बार-बार होने वाले परीक्षा घोटालों ने छात्रों में अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली आवश्यक है।
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आए कई परीक्षा विवादों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा उपाय स्थापित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए व्यापक सुधारों का आह्वान किया।
छात्रों की गूंज अभियान कांग्रेस पार्टी के देशव्यापी जनसंपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों और बेरोजगार युवाओं से जुड़ना है। यह अभियान शिक्षा, रोजगार, परीक्षा पारदर्शिता और भर्ती सुधारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
राहुल गांधी ने छात्रों को यह भी आश्वासन दिया कि कांग्रेस संसद के भीतर और जन आंदोलनों के माध्यम से उनकी चिंताओं को उठाती रहेगी। उन्होंने युवाओं से शिक्षा नीति और रोजगार सुधारों पर चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश भर में कई भर्ती और प्रवेश परीक्षा विवादों के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। इस बीच सरकार ने कहा है कि वह भविष्य में पेपर लीक रोकने और निष्पक्ष परीक्षाएं सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल सुरक्षा, निगरानी प्रणालियों और कानूनी तंत्र को मजबूत कर रही है।
संसद का सत्र जल्द ही फिर से शुरू होने वाला है, ऐसे में शिक्षा सुधार और परीक्षा पारदर्शिता सरकार और विपक्ष दोनों के बीच बहस के प्रमुख मुद्दों में बने रहने की उम्मीद है।

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