कई विपक्षी दलों ने देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के माध्यम से सभी सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों को संबोधित एक पत्र में दलों ने आरोप लगाया कि हाल के कई चुनावों में परिणामों ने जनादेश को सही मायने में प्रतिबिंबित नहीं किया।
इस पत्र पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, समाजवादी पार्टी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कई वामपंथी दलों सहित कई भाजपा-विरोधी दलों ने हस्ताक्षर किए हैं।
विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने के लिए बढ़-चढ़कर किया जा रहा है।
पत्र में भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया गया और 2014 के बाद की गई नियुक्तियों में पक्षपात का आरोप लगाया गया। इसमें बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर आपत्ति जताई गई और इस कवायद को अनावश्यक तथा राजनीति से प्रेरित बताया गया।
विपक्षी दलों ने आगे आरोप लगाया कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में हाल के विधानसभा चुनावों में हेराफेरी की गई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भी आलोचना की और चुनाव आयोग पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों को नजरअंदाज करने तथा सत्तारूढ़ दल के नेताओं की सांप्रदायिक टिप्पणियों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
पत्र में चेतावनी दी गई कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाएं विफल रहती हैं और न्यायपालिका भी मौन रहती है, तो व्यवस्था में जनता का भरोसा और कमजोर हो सकता है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची संशोधन की समीक्षा और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल पर नए सिरे से बहस की मांग की है, जबकि कुछ ने पेपर बैलेट पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया है।


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