पुणे, महाराष्ट्र: पहले से सनसनीखेज बने लोहागढ़ किला हत्याकांड ने एक और नाटकीय मोड़ ले लिया है, और इस बार यह मोड़ जांच के कारण नहीं, बल्कि इस बात को लेकर आए कानूनी विवाद के चलते है कि अदालत में आरोपी सिया गोयल का आधिकारिक प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है।
विवाद तब शुरू हुआ जब दो अलग-अलग वकीलों ने दावा किया कि वे इस मामले में सिया की पैरवी कर रहे हैं। अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें सिया द्वारा कानूनी रूप से नियुक्त किया गया है और वे पहले ही अदालत में हस्ताक्षरित वकालतनामा जमा कर चुके हैं। हालांकि, सिया के परिवार ने इस दावे को चुनौती दी।
सिया के भाई साहिल गोयल ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया कि श्रीवास्तव को परिवार ने नियुक्त किया था। साहिल के अनुसार, परिवार ने सिया की पैरवी के लिए अधिवक्ता विपुल दुशिंग को नियुक्त किया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि श्रीवास्तव को सिया के हस्ताक्षर वाले कानूनी दस्तावेज कैसे मिले।
मामला उस समय और तेजी से बढ़ गया जब अधिवक्ता श्रीवास्तव ने साहिल गोयल को ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस भेज दिया। नोटिस में श्रीवास्तव ने साहिल पर उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे बयान देने का आरोप लगाया और सार्वजनिक माफी की मांग की।
हालांकि, श्रीवास्तव अपने दावे पर अडिग रहे। उन्होंने दलील दी कि सिया बालिग है और अपने परिवार की इच्छा से परे, अपना वकील चुनने के लिए कानूनी रूप से सक्षम है। उनके अनुसार, यदि सिया ने खुद वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए हैं, तो उनकी पैरवी कानूनी रूप से वैध बनी रहती है।
यह कानूनी खींचतान ऐसे समय में सामने आई है जब पुलिस केतन अग्रवाल की हत्या की जांच जारी रखे हुए है, एक ऐसा मामला जो पहले ही राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर चुका है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि 20 वर्षीय सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने पुणे के पास लोहागढ़ किले पर अग्रवाल की हत्या की साजिश रची।
पुलिस को शक है कि यह हत्या पूर्व नियोजित थी और उनका दावा है कि आरोपियों ने पहले ही घटनास्थल का अध्ययन किया था। जांचकर्ता यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या योजना के तहत घटना से पहले किले के कई बार दौरे किए गए थे।
हत्या की जांच पहले से ही गहन निगरानी में है, और अब पैरवी को लेकर इस विवाद ने मामले में जटिलता की एक और परत जोड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत को जल्द ही औपचारिक रूप से यह तय करना पड़ सकता है कि सिया की पैरवी कौन कर रहा है, क्योंकि आगे की कार्यवाही में कानूनी सलाहकार को लेकर स्पष्टता अहम होगी।


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