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Tue, Jul 21, 2026
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कांग्रेस ने ऑस्ट्रेलिया-भारत यूरेनियम समझौते पर सरकार के दावों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया-भारत यूरेनियम समझौते को लेकर एक राजनीतिक बहस छिड़ गई है, जहां कांग्रेस ने सरकार पर एक ऐसी प्रक्रिया का श्रेय लेने का…

कांग्रेस ने ऑस्ट्रेलिया-भारत यूरेनियम समझौते पर सरकार के दावों पर उठाए सवाल
Prime Minister Narendra Modi's visit to Australia, with the Congress accusing the government of taking credit for a process that began more than a decade ago.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया-भारत यूरेनियम समझौते को लेकर एक राजनीतिक बहस छिड़ गई है, जहां कांग्रेस ने सरकार पर एक दशक से भी अधिक पहले शुरू हुई प्रक्रिया का श्रेय लेने का आरोप लगाया है।

यह विवाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक प्रशासनिक व्यवस्था पर हस्ताक्षर के बाद उपजा है, जो भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ करती है। इस समझौते की घोषणा दोनों देशों के बीच रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक साझेदारी में सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से बने एक व्यापक पैकेज के हिस्से के रूप में की गई थी। (reuters.com)

कांग्रेस ने तर्क दिया कि ऑस्ट्रेलिया की भारत को यूरेनियम निर्यात की अनुमति देने वाली नीतिगत बदलाव को 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी, जो मौजूदा सरकार के सत्ता में आने से काफी पहले की बात है। विपक्ष के अनुसार, ताजा घटनाक्रम को पूरी तरह एक नई कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना उन पहले के फैसलों की अनदेखी करता है जिन्होंने इस साझेदारी की नींव रखी।

हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि जहां नीतिगत फैसले और 2014 के नागरिक परमाणु सहयोग समझौते ने ढांचा स्थापित किया, वहीं ताजा प्रशासनिक व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूरेनियम आपूर्ति के क्रियान्वयन को संभव बनाती है। अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता वर्षों की बातचीत को परिचालनगत सहयोग में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। (reuters.com)

विशेषज्ञ बताते हैं कि दोनों पक्ष एक ही प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों का उल्लेख कर रहे हैं। 2011 का नीतिगत फैसला और 2014 का द्विपक्षीय नागरिक परमाणु समझौता कानूनी और कूटनीतिक नींव तैयार करता है, वहीं ताजा व्यवस्था क्रियान्वयन और व्यावहारिक अमल पर केंद्रित है।

ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के कुछ सबसे बड़े यूरेनियम भंडार हैं, और इसकी आपूर्ति तक पहुंच से भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की अपनी रणनीति के हिस्से के रूप में परमाणु बिजली उत्पादन बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

इस मुद्दे ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया है कि बड़े कूटनीतिक समझौते अक्सर कई वर्षों में विकसित होते हैं, जिनमें क्रमिक सरकारें योगदान देती हैं।

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