अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित दान चोरी मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, क्योंकि जांचकर्ता लगातार नए तथ्य उजागर कर रहे हैं। जारी जांच के निष्कर्षों के अनुसार, चोरी की नकदी को शक से बचने के लिए कथित तौर पर मंदिर परिसर के भीतर एक बाथरूम में छिपाया गया और फिर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला गया।
जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि यह पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। संदिग्धों ने कथित तौर पर परिसर के भीतर सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाया, ताकि उनकी गतिविधियां किसी की नजर में न आएं।
जांचकर्ताओं का मानना है कि चोरी की पूरी रकम एक साथ ले जाना जोखिम भरा माना गया। नतीजतन, आरोपियों ने कथित तौर पर वॉशरूम जैसे कम निगरानी वाले इलाकों को अस्थायी छिपाने के ठिकानों के रूप में इस्तेमाल किया। इसके बाद नकदी को समय के साथ धीरे-धीरे छोटे-छोटे हिस्सों में बाहर निकाला गया।
विशेष जांच दल (एसआईटी) अब इस कथित घोटाले के पीछे के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसमें केवल निचले स्तर के कर्मचारी शामिल थे या पर्दे के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
हाल की छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर नकदी, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा बरामद की। जांचकर्ता मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध संपर्कों की भी जांच कर रहे हैं।
इस मामले ने देशभर के श्रद्धालुओं में गंभीर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि राम मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। दान की राशि के गबन के आरोपों ने मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। यदि सबूत ऊंचे स्तर पर संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं, तो और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है।


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