राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर के संतों में नाराजगी:अयोध्या में मर्यादा छोड़ दी; जिम्मेदारों को ट्रस्ट के पद छोड़ने चाहिए

राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर के संतों में नाराजगी है। वो कहते हैं कि यह रामजी की अयोध्या है, जहां मर्यादा के लिए उन्होंने सीता माता का त्याग किया। अब करोड़ों का चढ़ावा चोरी हो गया, लेकिन ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी आगे आकर जिम्मेदारी नहीं ले रहा। अपने पदों को छोड़ने की बात नहीं कर रहा है।
कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर करते हैं, ‘शास्त्रों में लिखा है, मंदिर का धन हड़पने वाले 60 हजार साल तक कीड़े बनते हैं। ऐसे लोग जल्द सामने आएंगे।’
SIT 3 दिन से कारसेवकपुरम के अंदर जांच कर रही है। चर्चा है कि 6 लोगों से 2 करोड़ से ज्यादा का कैश रिकवर हो चुका है। अनुमान है कि 200 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा चोरी हो चुका है।
संत बोले- राम का जीवन त्याग है, उनके घर में चोरी कैसे की
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर के दान चोरी का मामला अब तक की सबसे दुखद घटना है। 2 साल पहले राम मंदिर बना और अभी ऐसा मामला सामने आ गया। इसीलिए हम सनातन बोर्ड की पैरवी कर रहे हैं। फिर आप सोचिए, राम मंदिर में सरकारी अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है, यह ठीक नहीं है।
स्वदत्तं परदत्तं वा यो हरेत वसुन्धरा। षष्टिवर्षसहस्त्राणि विष्ठायां जायते कृमिः।।
इसका अर्थ कि जो मंदिर का धन खाएगा, वह 60 हजार साल तक मल का कीड़ा बनेगा।
हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि सनातन बोर्ड बने, धर्म में सरकारी अधिकारियों का हस्तक्षेप न हो। जिससे व्यवस्थाएं प्रभु के लिए और उनके भक्तों के लिए बेहतर हो सके।’

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हुआ। तब पहली रामकथा आचार्य शांतनुजी महाराज ने कही थी। अब चढ़ावा चोरी होने की घटना पर वह कहते हैं, ‘अयोध्या प्रभु श्रीराम की नगरी है। राम का पूरा जीवन मर्यादा को ही दिखाता है। एक धोबी की बात सुनकर उन्होंने पत्नी सीता का त्याग किया। अब जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उन्हें तो पद छोड़ ही देने चाहिए। जब तक जांच चल रही है, इन लोगों को खुद को ट्रस्ट से हटा लेना चाहिए।’
शांतनुजी कहते हैं, ’ये पद प्रतिष्ठा के लिए बना भी नहीं था। ये तो रामजी की सेवा के लिए था। लेकिन अब धोखा हो गया है। मैं व्यक्तिगत तौर पर निराश हूं। मैं रामकथा कहता हूं, इस घटना के बाद से मेरा मन नहीं लग रहा।
ऐसा सिर्फ मेरे साथ नहीं है, सभी संतों में नाराजगी है। संविधान के तहत अपनी मर्यादाओं में रहना पड़ता है। वरना रामजी के मंदिर में चोरी करने वालों को सामाजिक दंड भी मिलना चाहिए। ये चोरी रुपए, सोने-चांदी की नहीं, श्रद्धालुओं के भरोसे की है। हजारों रामभक्तों ने बलिदान दिया, तब मंदिर बना। अब ऐसा खुलासा हो रहा है।’
शांतनु कहते हैं, ‘किसी को भी नौकरी पर रख लिया गया। जिन्हें 18-20 हजार रुपए मिल रहे, उनका जीवन 3-4 महीने में बदल जा रहा है। ऐसा तो है नहीं कि ट्रस्ट में शामिल लोगों को यह सब नहीं दिखा होगा। ये राम मंदिर नहीं, राष्ट्र मंदिर है। बाकी मंदिरों से इसकी तुलना नहीं कर सकते। इसके लिए बहुत लंबा त्याग हुआ है। तब जाकर यह हासिल हुआ है।’

वैष्णव किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और पहली किन्नर जगतगुरू हिमांगी सखी कहती हैं, ’प्रभु श्रीराम का पूरा जीवन सिर्फ मर्यादा का वर्णन करता है। जो लोग ट्रस्ट में हैं, उन्हें भी मर्यादा दिखाते हुए हट जाना चाहिए। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की जांच ठीक से होनी चाहिए। उनके साथ ट्रस्ट में जो लोग हैं, नोट गिनने वाले जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन सबकी जांच होनी चाहिए। इस पूरे ट्रस्ट को भंग करके नया ट्रस्ट बनाना चाहिए।’
वह आगे कहती हैं, ’पहले के राजा-महराजा किन्नर समाज के लोगों को कोषाध्यक्ष बनाते थे। क्योंकि, किन्नर समाज के लोगों में लालच नहीं होता था। अब तो किन्नर समाज के 4 अखाड़े हो गए हैं। सभी अखाड़ों से 1-1 सदस्य को को राम मंदिर के ट्रस्ट में लेना चाहिए।’

मदन जी महराज का कहना है, ’राम मंदिर के चढ़ावे का रुपया जिन लोगों के यहां मिला है, उनके खिलाफ SIT जांच करे। ट्रस्ट के लोग किस स्तर तक शामिल हैं, यह भी सामने आना चाहिए। यह देशभर के करोड़ों लोगों के भरोसे का मामला है।
श्रद्धालु कभी नहीं चाहते कि उनके रुपए से कुछ लोग अपनी तिजोरियां भरें। वह चाहता है कि उसके दान के रुपए से समाज में कल्याणकारी काम हों।’

रुपेंद्र प्रकाश शास्त्री कहते हैं, ‘राम मंदिर के चढ़ावे में जो गड़बड़ी हुई है, मुझे नहीं लगता कि उसमें चंपत राय की भूमिका होगी। लेकिन, उनके ड्राइवर और सगे-संबंधियों के बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं। अभी तो जांच हो रही है। तथ्य सामने आ जाएंगे। उससे पहले कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा।‘

रविंद्र पुरी कहते हैं, ‘आगे चुनाव हैं, इसलिए इस तरह के आरोप लग रहे हैं। कुछ लोग संतों और राम मंदिर को बदनाम करना चाहते हैं। अभी जांच हो रही है, इसके बाद चीजें क्लियर हो जाएंगी। चंपत राय बहुत संत आदमी हैं। उनका जीवन हमने देखा है। उन्हें बदनाम करना उचित नहीं है।’



