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इबोला वायरस बना ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी:भारत भी अलर्ट पर

‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ (WHO) ने इबोला वायरस को ‘ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित किया है। इसके बाद भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। कांगो, युगांडा और सूडान की यात्रा करने वालों को खासतौर पर सावधानी बरतने को कहा गया है।

भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी इंटरनेशनल एंट्री पॉइंट्स, बॉर्डर इलाकों और एयरपोर्ट्स पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। साथ ही इबोला प्रभावित देशों की गैरजरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

  • इबोला वायरस कितना खतरनाक है?
  • इसका संक्रमण कैसे फैलता है?
  • इससे बचाव के क्या उपाय हैं?

सवाल- WHO ने इबोला को ‘ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी’ क्यों घोषित किया है?

जवाब- पूरी दुनिया में इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 900 हो गई है। इसके कारण कांगो में पिछले 20 दिनों में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला वायरस का ‘बुंडीबुग्यो’ वेरिएंट तेजी से फैल रहा है। इसलिए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है।

सवाल- किन देशों में इबोला के मामले सबसे ज्यादा हैं?

जवाब- अभी तक 10 अफ्रीकी देशों में इबोला के केस दर्ज किए गए हैं। इनमें शामिल हैं-

  • रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो
  • अंगोला
  • बुरांडी
  • सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक
  • इथोपिया
  • केन्या
  • रवांडा
  • साउथ सूडान
  • तंजानिया
  • जांबिया

सवाल- भारत सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की है?

जवाब- इबोला वायरस के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में 4 मुख्य बातें कही गई हैं-

  1. कांगो (DRC), युगांडा और साउथ सूडान की गैरजरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में इबोला संक्रमण का रिस्क है।
  2. एयरपोर्ट समेत अन्य एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
  3. अज्ञात बुखार वाले यात्रियों की पहचान, जांच, रिपोर्टिंग और उचित मैनेजमेंट सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
  4. WHO की सिफारिशों के अनुसार सावधानी बरतने और प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा कम करने की सलाह दी गई है।

सवाल- क्या भारत में अभी तक इबोला का कोई केस मिला है?

जवाब- नहीं, भारत में अभी तक इबोला वायरस का कोई मामला नहीं दर्ज हुआ है।

सवाल- भारत का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर इबोला से निपटने के लिए कितना तैयार है?

जवाब- सरकार ने इस पर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, भारत का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विलांस, जांच और संक्रमण नियंत्रण के लिए काफी हद तक तैयार है। अगर भारत में इबोला वायरस केस मिलते हैं तो कोविड से मिली लर्निंग्स काम आएंगी।

सवाल- इबोला वायरस क्या है? यह कितना खतरनाक है?

जवाब- इबोला एक गंभीर और बेहद संक्रामक वायरल ‘हेमरेजिक फीवर’ है। यह इबोला वायरस के संक्रमण से होता है। यह इंसानों और कुछ जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़ और प्राइमेट्स) को प्रभावित करता है।

यह कितना खतरनाक है?

इबोला के मामलों में मृत्यु दर बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इसे दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है।

सवाल- इबोला वायरस का संक्रमण कैसे फैलता है?

जवाब- इन माध्यमों से संक्रमण फैलता है-

  • संक्रमित व्यक्ति के ब्लड, लार, सलाइवा पसीने, उल्टी, यूरिन, मल या अन्य बॉडी फ्लूइड के सीधे संपर्क से।
  • संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर, सुई, मेडिकल इक्विपमेंट्स या अन्य दूषित वस्तुओं को छूने से।
  • संक्रमित जंगली जानवर, विशेषकर फल खाने वाले चमगादड़ों, बंदरों और अन्य प्राइमेट्स के संपर्क में आने से।
  • संक्रमित मरीज की देखभाल या अंतिम संस्कार के दौरान बिना सुरक्षा उपायों के संपर्क में आने से।

सवाल- क्या इबोला हवा (Airborne) से फैल सकता है?

जवाब- आमतौर पर इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता है। यह संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड के सीधे संपर्क से फैलता है।

सवाल- इबोला के शुरुआती लक्षण क्या हैं? किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं

सवाल- क्या इबोला जानलेवा होता है?

जवाब- हां, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है।

सवाल- इबोला की मृत्यु दर कितनी है?

जवाब- इबोला आउटब्रेक में मृत्यु दर लगभग 25% से 90% तक दर्ज की गई है।

सवाल- क्या इबोला वायरस के लिए वैक्सीन उपलब्ध है?

जवाब- इबोला वायरस के लिए पहले कई वैक्सीन बन चुकी हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो वेरिएंट (जो अभी फैल रहा है) के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

सवाल- विदेश यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- अगर किसी क्षेत्र में इबोला का आउटब्रेक चल रहा हो और आपको विदेश यात्रा करनी हो

सवाल- इबोला से बचाने में सैनिटाइजेशन और मास्क कितना प्रभावी है?

जवाब- हाथों की नियमित सफाई से इन्फेक्शन का रिस्क कम होता है।

  • सैनिटाइजर वायरस लगे हाथों को साफ करने में मददगार है।
  • मास्क संक्रमित व्यक्ति के फ्लूइड से संपर्क का रिस्क घटाता है।
  • अकेले मास्क पर्याप्त नहीं, अन्य सावधानियां भी जरूरी हैं।
  • स्वास्थ्यकर्मियों के लिए PPE किट सबसे प्रभावी सुरक्षा है।

सवाल- अगर कोई व्यक्ति या उसका परिचित हाल ही में युगांडा, कांगो, सूडान या इबोला प्रभावित देश में गया है तो उसे क्या करना चाहिए?

जवाब- 21 दिनों तक हेल्थ ऑब्जर्वेशन करें।

  • बुखार, कमजोरी, उल्टी या दस्त पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • यात्रा की डिटेल्स स्वास्थ्यकर्मी को बताएं।
  • लक्षण दिखने पर दूसरों से दूरी रखें।
  • स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें।

सवाल- इबोला का इलाज क्या है?

जवाब- मौजूदा वक्त में फैल रहे इबोला के ‘बुंडीबुग्यो’ वेरिएंट के लिए अभी कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या खास इलाज उपलब्ध नहीं है।

सवाल- किन लोगों को इबोला संक्रमण का रिस्क ज्यादा है?

जवाब- इन्हें इबोला संक्रमण का ज्यादा रिस्क है

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