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नौतपा में छोटे बच्चों को रखें सेफ:बाहर भेजते हुए ध्यान रखें 7 बातें

मौसम विभाग के मुताबिक, देश के कई शहरों में इन दिनों टेम्परेचर 45 डिग्री सेल्सियस के पार है। नौतपा के दौरान हाई टेम्परेचर और गर्म हवाओं से लू (हीट स्ट्रोक) का रिस्क बढ़ जाता है।

इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। दरअसल बच्चों का शरीर ज्यादा गर्मी या सर्दी के लिए तैयार नहीं होता है। शरीर एडॉप्शन सीख रहा होता है, उसे मदद की जरूरत होती है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही से बच्चे की स्थिति गंभीर हो सकती है।

बच्चों की दिनचर्या और खानपान में कुछ बदलाव करके उन्हें हीट स्ट्रोक यानी लू से बचाया जा सकता है।

  • किन बच्चों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा रिस्क होता है?
  • छोटे बच्चों को हीट स्ट्रोक से कैसे बचाएं?

एक्सपर्ट: डॉ. बिलाल खान, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक मेडिसिन एंड पीआईसीयू, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम और दिल्ली

सवाल- क्या गर्मियों में छोटे बच्चों को लू का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- हां, इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • बच्चों का मेटाबॉलिक रेट ज्यादा होता है। इससे उनका शरीर जल्दी गर्म हो जाता है।
  • स्वेट ग्लैंड्स मैच्योर न होने से पसीना कम आता है। इससे ‘बॉडी कूलिंग मैकेनिज्म’ उतना प्रभावी नहीं होता।
  • उनके ब्रेन और दूसरे ऑर्गन्स की सेल्स ज्यादा सेंसेटिव होती हैं, इसलिए उन्हें लू का रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- बच्चों को लू जल्दी क्यों लगती है?

जवाब- इसके कई कारण हैं। पॉइंटर्स से समझिए-

  • बच्चों का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम (बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता) पूरी तरह विकसित नहीं होता है।
  • उनका हीट के प्रति एडाप्टेशन कमजोर होता है।
  • इससे शरीर का फ्लूइड बैलेंस जल्दी बिगड़

    सवाल- अगर ऊपर ग्राफिक में बताए लक्षण न दिख रहे हों और बच्चा सिर्फ सुस्त हो तो क्या यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है?

    जवाब- हां, ज्यादा सुस्ती भी बच्चों में गर्मी से जुड़ी परेशानी का शुरुआती संकेत हो सकती है। लेकिन इसे सीधे हीट स्ट्रोक मानना सही नहीं है। अगर सुस्ती के साथ-

    • ज्यादा प्यास
    • चक्कर
    • सिरदर्द
    • उल्टी/मितली
    • शरीर गर्म लगना

    जैसे लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाना चाहिए।

    सवाल- किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

    जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें-

    • दौरे आना।
    • तेज सिरदर्द और चक्कर आना।
    • शरीर का तापमान (लगभग 103°F या उससे ऊपर) बढ़ना।
    • बेहोश या बार-बार सुस्त होना।
    • कन्फ्यूजन होना, अजीब व्यवहार करना।
    • बार-बार उल्टियां या पानी न पी पाना।
    • जल्दी-जल्दी सांस लेना या धड़कन तेज होना।
    • पसीना बंद हो जाना और स्किन बहुत गर्म/ड्राई लगना।

      सवाल- क्या बार-बार नहलाना बच्चे को हीट स्ट्रोक से बचा सकता है?

      जवाब- नहीं, यह शरीर को ठंडा रखता है और ओवरहीटिंग से बचाता है। इसके बावजूद यह पूरी तरह हीट स्ट्रोक नहीं बचा सकता है।

      बच्चे को नहलाने के साथ-

      • हाइड्रेटेड रखें।
      • दोपहर में सनलाइट एक्सपोजर से बचाएं।
      • उसे ठंडा एनवायर्नमेंट दें।

      सवाल- गर्मी में किसी काम से बाहर जाने वाले बच्चों के लिए क्या विशेष सावधानियां बरतना जरूरी है?

      जवाब- इसके लिए बच्चों को हाइड्रेशन से जुड़ी आदतें सिखाएं। उन्हें पानी की बॉटल, कैप आदि देकर भेजें। कुछ बेसिक सावधानियों से उन्हें गर्मी के असर से सुरक्षित रखा जा सकता है।

      सवाल- क्या छोटे बच्चों के लिए AC और कूलर का इस्तेमाल सुरक्षित है?

      जवाब- हां, लेकिन इस दौरान टेम्परेचर का ध्यान रखना चाहिए। गलत इस्तेमाल (बहुत ठंडा तापमान, डायरेक्ट हवा, अचानक टेम्परेचर में बदलाव) से सर्दी-खांसी, ड्राई स्किन, नाक में जलन या सांस संबंधी समस्याएं हो सकती है। अगर बच्चा नवजात है तो एसी और कूलर के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

      सवाल- गर्मियों में बच्चे अक्सर आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक की जिद करते हैं। उसकी जगह बच्चों को कौन-से हेल्दी कूलिंग ड्रिंक्स दे सकते हैं?

      जवाब- बच्चों को इसकी बजाय ये हेल्दी समर कूलिंग ड्रिंक्स दें-

      • नारियल पानी
      • नींबू पानी
      • आम पन्ना
      • छाछ
      • लस्सी
      • तरबूज का जूस
      • घर पर बने ताजे फल/सब्जी के स्मूदी और जूस
      • बेल का शरबत

      ये ड्रिंक्स हाइड्रेटेड रखते हैं और पेट को ठंडक पहुंचाते हैं। साथ ही जरूरी विटामिन्स/इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर भी होते हैं।

      सवाल- अगर बच्चे को हीट स्ट्रोक हो जाए तो घर पर तुरंत क्या करना चाहिए?

      जवाब- बच्चे को हीट स्ट्रोक हो जाए तो-

      • तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं।
      • बच्चे के कपड़े ढीले करें या एक्स्ट्रा कपड़े हटाएं।
      • बच्चे को ठंडी हवा में रखें।
      • गीले कपड़े/स्पंज से शरीर पोंछें, खासकर गर्दन, बगल, जांघों के पास, जिससे शरीर का तापमान कम हो।
      • अगर बच्चा होश में है तो पानी, ORS, नारियल पानी छोटे-छोटे घूंट में दें।
      • बहुत ठंडा पानी या बर्फ सीधे न लगाएं।
      • लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर रखें और बच्चे को अकेला न छोडे़ं।
      • अगर स्थिति सामान्य न हों या लक्षण गंभीर हों तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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