बच्चे के लिए कितना एजुकेशन फंड जरूरी:कैसे फंड बनाएं, एजुकेशन लोन के फायदे-नुकसान, एक्सपर्ट से जानें हर सवाल का जवाब

सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल करें और अपने सपने पूरे करें। लेकिन महंगाई के इस दौर में पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से एजुकेशन फंड तैयार करना बेहद जरूरी है, ताकि सही समय पर पैसों की कमी बच्चों के भविष्य में बाधा न बने।
सही निवेश और स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग से बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। अगर आप भी अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं तो इस बारे में सबकुछ जानना जरूरी है।
सवाल- एजुकेशन इंफ्लेशन क्या है और यह कितनी तेजी से बढ़ रहा है?
जवाब- एजुकेशन इंफ्लेशन का मतलब है, वक्त बीतने के साथ शिक्षा से जुड़ी लागत यानी फीस, कोचिंग, बुक्स, हॉस्टल की कीमत का लगातार बढ़ना। इसका मतलब आज जो पढ़ाई 1 लाख में हो रही है, वही कुछ साल बाद 2-3 लाख तक हो सकती है।
- औसतन 5-6% सालाना बढ़ोतरी हो रही है।
- मेडिकल/इंजीनियरिंग के खर्च इससे भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं।
- इसकी वजह लगातार टेक्नोलॉजी में बदलाव और प्रैक्टिकल में इस्तेमाल होने वाले महंगे इक्विपमेंट्स हैं।
सवाल- बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड बनाना कब शुरू करना चाहिए?
जवाब- इसके लिए जितनी जल्दी फंड बनाएं, उतना बेहतर है। आइडियली बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती सालों में ही निवेश शुरू कर देना चाहिए।
जल्दी शुरुआत क्यों जरूरी?
- एजुकेशन इंफ्लेशन तेजी से बढ़ रहा है।
- जल्दी शुरू करने से कम पैसे में बड़ा फंड बन सकता है।
- कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा मिलता है।
सवाल- एजुकेशन फंड के लिए हर महीने कितना निवेश करना चाहिए?
जवाब- इसके लिए आमतौर पर अपनी इनकम का 10-15% हर महीने निवेश करना एक अच्छा नियम माना जाता है।
सही रकम इन बातों पर निर्भर करती है-
सवाल- SIP क्या है और यह कैसे काम करता है?
जवाब- SIP एक ऐसा तरीका है, जिसमें हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इससे धीरे-धीरे एक बड़ा फंड बना सकते हैं।
एजुकेशन फंड बनाने में SIP इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि-
- यह रेगलुर निवेश की आदत बनाता है।
- कंपाउंडिंग के कारण समय के साथ पैसा तेजी से बढ़ता है।
- एक साथ बड़ी रकम निवेश करने की जरूरत नहीं होती है।
- लॉन्ग टर्म में बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई हर महीने थोड़ी रकम SIP में निवेश करता है तो 10-15 साल में यह एक अच्छा खासा एजुकेशन फंड बन सकता है।
सवाल- कंपाउंडिंग का बच्चों के एजुकेशन फंड पर क्या असर पड़ता है?
जवाब- कंपाउंडिंग का मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है। यानी ब्याज पर ब्याज मिलता है।
एजुकेशन फंड बनाने में इसका बड़ा फायदा मिलता है, क्योंकि-
- जितनी जल्दी निवेश शुरू करते हैं, कंपाउंडिंग को उतना ज्यादा समय मिलता है।
- समय के साथ छोटा निवेश भी बड़ी रकम में बदल सकता है।
- लंबे समय (10-15 साल) में ग्रोथ तेजी से मिलती है।
सवाल- अगर बीच में निवेश रोक दिया तो क्या होगा?
जवाब- इसके ये नुकसान हो सकते हैं-
- फंड अपने लक्ष्य से कम रह जाएगा।
- कंपाउंडिंग का पूरा फायदा नहीं मिलेगा।
- बाद में लक्ष्य पूरा करने के लिए ज्यादा पैसा निवेश करना पड़ेगा।
- निवेश में निरंतरता टूटने से लंबी अवधि की ग्रोथ प्रभावित होती है।
इसलिए, बेहतर है कि SIP को लंबे समय तक जारी रखा जाए, ताकि बच्चों के एजुकेशन फंड का लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकें।
- कितने साल बाद फंड की जरूरत होगी।
- महंगाई (एजुकेशन इंफ्लेशन)।
- आपकी वर्तमान इनकम और खर्च।
इसलिए बेहतर है कि अपने लक्ष्य के हिसाब से निवेश तय करें। अगर लक्ष्य बड़ा है या समय कम है, तो 10-15% से ज्यादा भी निवेश करना पड़ सकता है।



