अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 8 साल बाद चीन दौरे पर रवाना:मस्क-कुक समेत 17 CEO साथ ले गए, 9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव

ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मंगलवार रात चीन दौरे पर रवाना हुए। ट्रम्प 13 से 15 मई तक बीजिंग में रहेंगे। यह 2017 के बाद उनका पहला चीन दौरा होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रम्प के बीच गुरुवार और शुक्रवार को अलग-अलग दौर की बातचीत होगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ताइवान, रेयर अर्थ मिनरल्स, AI और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रम्प के साथ इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक और बोइंग CEO समेत 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए हैं। हालांकि चिप कंपनी एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं होंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरे में 9 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बोइंग विमान डील हो सकती है। चीन 500 बोइंग 737 MAX, 100 बोइंग 787 ड्रीमलाइन और कई 777X वाइडबॉडी विमान खरीद सकता है। अगर करार हुआ तो यह इतिहास का सबसे बड़ा विमान सौदा होगा।

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प को स्टेट डिनर देंगे
व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में भव्य स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। चीन में इस तरह के स्टेट डिनर को बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाता है।
ऐसे कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं।
डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक स्वागत देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का संकेत माना जाता है। स्टेट डिनर के जरिए चीन यह संदेश देने की कोशिश करता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर महत्व दे रहा है।
ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 के चीन दौरे के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था।


चीन पर ईरानी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा अमेरिका
अमेरिका चाहता है कि चीन ईरानी तेल की खरीद कम करे, ताकि तेहरान की कमाई घटे और उस पर दबाव बढ़े। अगर चीन खरीद कम करता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल निर्यात उसकी सबसे बड़ी आय का स्रोत है।
हालांकि चीन पहले भी साफ कर चुका है कि वह अपने ऊर्जा हितों के आधार पर फैसले लेता है और बाहरी दबाव में नीति नहीं बदलता। बीजिंग का कहना है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है।
इसी वजह से ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका व्यापार और टैरिफ विवाद के साथ ईरानी तेल को लेकर भी चीन से सहयोग मांग सकता है।



