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राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा-पाकिस्तान से बातचीत, वीजा सर्विस जारी रखें:खेल और व्यापार भी चलता रहे; लेकिन पुलवामा जैसी हरकत का जवाब मजबूती से देंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। दोनों देशों को एक-दूसरे को वीजा भी देना चाहिए। खेलकूद और व्यापार भी होना चाहिए। लेकिन पुलवामा जैसे हमले का जवाब भी मजबूती से देना होगा।

न्यूज एजेंसी PTI के CEO विजय जोशी को दिए इंटरव्यू में होसबाले ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध पुराने हैं और हम एक ही राष्ट्र रहे हैं। राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर भरोसा कम होने के कारण पाकिस्तान के खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसायटी को आगे आना चाहिए।

होसबाले के इंटरव्यू की 3 बड़ी बातें…

  • सनातन खत्म करने पर- उदयनिधि स्टालिन ने सनातन खत्म करने की बात कही है। लेकिन सनातन शाश्वत है, सिर्फ इसलिए गायब नहीं हो जाएगा क्योंकि कोई कहता है कि इसे खत्म कर देना चाहिए।
  • ईरान युद्ध संसाधनों की लड़ाई- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष सभ्यताओं का संघर्ष नहीं बल्कि तेल और संसाधनों को लेकर पैदा हुआ विवाद है। दुनिया के ज्यादातर युद्ध लालच, अहंकार और दूसरों पर कब्जा करने की मानसिकता से जन्म लेते हैं। इतिहास में हर दौर में युद्ध होते रहे हैं और आगे पानी को लेकर भी संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। युद्ध मानवता को खत्म नहीं करेंगे, लेकिन मानव जीवन और व्यवस्था को जरूर बदल देंगे।
  • पीएम मोदी की अपील का समर्थन- युद्ध जैसी स्थिति हो या न हो, भारतीय जीवनशैली में सादगी और संयम हमेशा होना चाहिए। संकट के समय यह और ज्यादा जरूरी हो जाता है। भारत दुनिया के देशों और नेताओं को शांति और समझदारी का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

PTI के सवालों पर होसबाले के जवाब-

सवाल: मुस्लिमों को कैसे भरोसा दिलाया जा सकता है कि वे इंडिया में सेफ हैं और हिंदू राष्ट्र का मतलब कल्चरल से है न कि धर्म से? जवाब: हम हिंदू राष्ट्र बना नहीं रहे हैं, यह पहले से हिंदू राष्ट्र है। ब्रिटिश शासन के समय भी यह हिंदू राष्ट्र ही था। हिंदू राष्ट्र का अर्थ सांस्कृतिक पहचान से है, न कि धार्मिक राज्य से। धर्म परिवर्तन से राष्ट्रीयता नहीं बदलती। जब राष्ट्रीयता एक है तो हम किसी को अलग नहीं मानते। भारत में मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं माना जाता। सरकारी योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंच रहा है और RSS लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं से बात करता है।

सवाल: संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि सभी का डीएनए एक है। तो फिर लव-जिहाद पर इतना विवाद क्यों है? जवाब: लव जिहाद तब होता है जब कोई एजेंडा हो, हिंदू लड़कियों को ले जाने की सोची-समझी साजिश हो। यह मंजूर नहीं है। जब यह एकतरफा हो तो यह प्यार नहीं यह एक साजिश है।

सवाल: असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल चुनाव के बाद कहा कि मुस्लिमों को अलग पार्टी बनानी चाहिए? जवाब: संविधान में सबको पार्टी बनाने का अधिकार है। मुसलमानों में नेशनलिस्ट लीडरशिप बहुत कम देखने को मिलती है। कम्युनिटी किसी को तभी सपोर्ट करेगी जब वह सेपरेटिस्ट हो।

सवाल: हमें पाकिस्तान के साथ कैसे डील करनी चाहिए? जवाब: अगर पाकिस्तान पुलवामा जैसी हरकत करता है, तो देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए भारत को हालात के मुताबिक जवाब देना होगा। लेकिन साथ ही हमें बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यापार और कॉमर्स, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए, क्योंकि बातचीत के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रहनी चाहिए। इसीलिए डिप्लोमैटिक संबंध बनाए रखे गए हैं। वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों को आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति नफरत पैदा हो गई है।

RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान, मुस्लिमों और पश्चिम एशिया युद्ध समेत अन्य मुद्दों पर बात की। - Dainik Bhaskar

सवाल: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों RSS स्वयं सेवकों की कितनी भूमिका है? जवाब: नागरिक के तौर पर उन्होंने हर स्तर पर काम किया। बंगाल में हर हिंदू वोटर हिंदू वर्कर बन गया था। नतीजों से यह साबित होता है कि जब जनता परेशान होगी तो जनता पलटवार करेगी।

सवाल: विदेश में रहने वाले भारतीय वहां मंदिर बना रहे हैं, जिससे उस देश के लोगों के साथ उनके व्यवहार खराब हो रहे हैं। उन्हें इसे कैसे बैलेंस करना चाहिए? जवाब: हनुमान मंदिर या मूर्तियां गैरकानूनी तरीके से नहीं बनाई गईं। भारतीय आमतौर पर कानून मानने वाले लोग हैं और उनका क्राइम रेट भी कम है। कई देशों में भारतीयों ने मेहनत से अपनी पहचान बनाई है, लेकिन उनकी सफलता से कुछ लोगों में नौकरी छिनने का डर पैदा होता है। विदेश में रहने वाले भारतीयों को जिस देश में वे रहते और कमाते हैं, उसके प्रति जिम्मेदारी और वफादारी भी दिखानी चाहिए। भारत से जुड़ाव स्वाभाविक है, लेकिन वहां के समाज और समुदाय की चिंता करना भी जरूरी है।

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