सैनिक बेटे का शव देखकर रोने लगे पिता:मां और पत्नी पार्थिव देह पर सिर रखकर रोने लगीं, 3 साल की बेटी ने दी पुष्पांजलि

चित्तौड़गढ़ जिले के जवान की दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में गुरुवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। जवान पहलवान गुर्जर (29) की नई दिल्ली में पोस्टिंग थी।
शुक्रवार को पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव धीरजी का खेड़ा (भदेसर उपखंड) लाया गया। जवान का शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। मां उदी बाई और पत्नी विद्या पार्थिव देह पर सिर रखकर रोने लगीं। पिता रामलाल बेटे का शव देख फफक पड़े।
वीरांगना ने रोते हुए तिरंगे को सिर से लगाया। 3 साल की मासूम बेटी ने पिता को पुष्पांजलि दी तो वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े।
इससे पहले पार्थिव देह को दिल्ली से चित्तौड़गढ़ लाया गया। पैतृक गांव धीरजी तक 8 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वाहनों पर तिरंगा झंडा लेकर भारत माता के जयकारे और पहलवान गुर्जर अमर रहे के नारे लगाते हुए साथ चले।


जवान पहलवान गुर्जर के जीवन का सफर …
अस्पताल में आया हार्ट अटैक
बड़े भाई रमेश गुर्जर ने बताया- पहलवान गुर्जर 20 मार्च 2017 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग राजपूत रेजिमेंट की 24वीं बटालियन में हुई थी। पहलवान गुर्जर नई दिल्ली में पोस्टेड थे।
बुधवार (15 अप्रैल) शाम ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उनके साथी जवानों ने उन्हें आर्मी हॉस्पिटल भर्ती करवाया था। गुरुवार (16 अप्रैल) सुबह हॉस्पिटल में ही हार्ट अटैक से निधन हो गया।
8 किलोमीटर तिरंगा यात्रा निकाली
सूचना के बाद परिजन दिल्ली पहुंचे। गुरुवार रात पार्थिव देह को एंबुलेंस से लेकर रवाना हुए। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे चित्तौड़गढ़ के गंगरार पहुंचे। जहां से पार्थिव देह को सेना की गाड़ी में रखा गया।
सेना का ट्रक सुबह 11:30 बजे गांव होड़ा चौराहे पहुंचा। होड़ा चौराहे से पैतृक गांव धीरजी का खेड़ा तक 8 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। इसक बाद जवान का अंतिम संस्कार उनके गांव धीरजी का खेड़ा की सहकारी समिति के पीछे खाली जमीन पर किया गया।
दूसरे प्रयास से सेना में हुआ था सलेक्शन
पहलवान गुर्जर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव धीरजी का खेड़ा में ही की थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भदेसर में पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए वह चित्तौड़गढ़ गए, जहां वह कॉलेज में पढ़ाई की।
पहलवान गुर्जर का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। दो बार प्रयास किया था। पहली बार चेन्नई में जाकर तैयारी की, लेकिन किसी कारण से सलेक्शन नहीं हो पाया था। इसके बाद झुंझुनू जाकर तैयारी की। दूसरे प्रयास में सेना में भर्ती हुए।
पिता बोले-ड्यूटी के बाद रोज फोन करता था
पिता रामलाल गुर्जर ने बताया- पहलवान रोज ड्यूटी से लौटने के बाद रात 8 बजे घर पर जरूर फोन करता था। पिछले 20-25 दिनों से बहू दिल्ली में ही बेटे के साथ थी। पहलवान गुर्जर आखिरी बार करीब 5-6 महीने पहले गांव आया था।
कुछ दिन पहले ही उसने फोन करके कहा था कि दिल्ली में बारिश हो रही है, इसलिए गेहूं की फसल को सुरक्षित रख लो। हो सकता है राजस्थान में भी बारिश हो जाए, अगर ऐसा हुआ तो फसल खराब हो जाएगी।
बहन की बीमारी को लेकर रहते थे चिंतित
पहलवान गुर्जर अपनी बड़ी बहन कंकू से भी बहुत लगाव रखते थे। उनकी बहन के पैर में बीमारी है, जिसको लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। फोन पर अक्सर बहन के इलाज और तबीयत के बारे में पूछते थे। वह चाहते थे कि उनकी बहन जल्दी ठीक हो जाए।




