बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल,सवाल पर भड़के मंत्री:बोले-1000 में से 2 की डेथ हो जाती है, दुरुस्त लोगों को आप नहीं देख रहे

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले को लेकर गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर उस समय उखड़ गए, जब उनसे पीड़ित महिलाओं में एक जैसे लक्षण सामने आने और डिलीवरी के दो-तीन घंटे बाद ही तबीयत बिगड़ने को लेकर सवाल पूछा गया।
पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि सभी महिलाओं में लगभग समान लक्षण देखने को मिले हैं और सभी की डिलीवरी के कुछ घंटे बाद ही हालत बिगड़ी है, ऐसे में सरकार इस मामले को किस तरह देख रही है।
इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि सभी महिलाओं की तबीयत पहले से ही ठीक नहीं थी। उन्होंने मीडिया के सवाल पर कहा- वो गंभीर हालत में आई थी। आप क्या बात कर रहे हो।
मंत्री खींवसर ने इस दौरान सवाल का जवाब देने के लिए सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज (एसपीएमसी) के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा को बुलाते हुए कहा- आप ही बताइए कैसी हालत में आई थी, पैदल चलकर नाचती आई थी या बीमार होकर आई थी।
1000 पेशेंट आते हैं, उसमें से 2 की डेथ हो जाती है, बाकि दुरुस्त जाते हैं वो आप नहीं बोल रहे हो।

बोले- 1000 में से 2 मौत
हालांकि, मंत्री खींवसर ने इसका जवाब नहीं दिया। खींवसर ने कहा- PBM में कितने पेशेंट आते हैं, अलग-अलग इलाज के लिए। इसमें कितने ठीक होकर जाते हैं, कितनों की डेथ होती है। वो तो आप देख ही नहीं रहे। स्ट्राइक रेट तो आप देख ही नहीं रहे हो।
जो 5 पेशेंट आए थे, जिनकी डिलीवरी हुई उसके 2 से 4 घंटे बाद उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद मंत्री ने प्रिंसिपल को बुला लिया और जवाब देने को कहा। उन्होंने कहा- बताओ कैसे आई थी, पैदल चलकर नाचती आई थी।
मीडिया ने पूछा- 8 महीने से लगातार दवाइयों की सप्लाई नहीं है। ऑक्सीटोसिन बाहर से खरीदा जाता है। गॉज नहीं है, बच्चों को लगाने का कैनुला नहीं है। जवाब: आ जाएगा, आ जाएगा। खरीद कर रहे हैं न। ये (ग्रामीण) जब CHC भी जाते हैं तो प्रिकॉशन नहीं लेते हैं। PBM में कितने पेशेंट आए और कितने ठीक हुए वो आप नहीं बोल रहे हो। 1000 पेशेंट आते हैं, उसमें से 2 की डेथ हो जाती है, बाकि दुरुस्त जाते हैं वो आप नहीं बोल रहे हो।
पढ़िए मंत्री ने क्या कहा-
- ‘ज्यादातर महिलाएं पहले से थीं बीमार’
मंत्री खींवसर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में विटामिन और पोषण की कमी आम समस्या है। उनका कहना था कि अधिकांश महिलाएं अस्पताल पहुंचने से पहले ही विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उन्होंने दावा किया कि सभी महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल आई थीं और उनकी मेडिकल स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- डी-हाइड्रेशन संभावित कारण
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं में डी-हाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी कई बार गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बनती है और इसकी भी जांच की जा रही है।

दवाओं की खरीद नहीं के मुद्दे को टाल गए
मंत्री से जब ये सवाल किया गया कि पिछले आठ महीने से दवाओं की खरीद नहीं हुई तो वो इस सवाल को ही टाल गए। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब आया तो कहा गया कि कैनूला नहीं है तो हमने उपलब्ध करा दिया। दवाएं क्यों नहीं आ रही? आक्सीटोसिन इंजेक्शन क्यों नहीं आ रहा है? इन सवालों के उन्होंने जवाब नहीं दिया।

डॉक्टरों का किया बचाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री ने डॉक्टरों का बचाव करते हुए कहा कि चिकित्सा कर्मी प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों की जान बचाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, “हम इतने लोगों की जान बचाते हैं, तब आप नहीं कहते।” मंत्री ने कहा कि पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।



