मध्य प्रदेश

कोर्ट के बार-बार बुलाने पर नहीं गए ग्वालियर एसपी:कहा- यहां अलग ही कानून चल रहा, आने से परहेज है; अब कल होंगे पेश

ग्वालियर में बुधवार को विशेष सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह की कार्य प्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने तीन बार पुलिस अधीक्षक को बुलाया, लेकिन एसपी ग्वालियर नहीं आए और अंत में मतलब शाम को संदेश आया कि कल (26 मार्च) दोपहर 12 बजे न्यायालय में उपस्थित रहेंगे।

कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई है और कोर्ट ने कहा कि यहां अलग ही कानून चल रहा है। धोखाधड़ी की FIR इनकी इजाजत के बिना नहीं हो रही है। यदि पुलिस अधीक्षक को कोर्ट में आने से परहेज है तो हमें भी कानून आता है।

यह पूरा मामला ग्वालियर के चर्चित बन्हेरी गांव में हाल ही में फर्जी हत्या के प्रयास के मामले से जुड़ा है। उसी केस की सुनवाई के दौरान एसपी को ग्वालियर में तलब किया था।

एसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह गुरुवार को कोर्ट में पहुंचेंगे।

अक्टूबर 2023 में सरपंच की कर दी थी हत्या

ग्वालियर के घाटीगांव सर्कल स्थित आरोन थाना क्षेत्र का बन्हेरी गांव पिछले तीन साल से काफी चर्चित रहा है। अक्टूबर 2023 में बन्हेरी गांव के सरपंच विक्रम सिंह रावत की ग्वालियर शहर में पड़ाव क्षेत्र में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सरपंच समर्थकों ने आक्रोशित होते हुए आरोपी पक्ष और उनसे मेलजोल रखने वाले लोगों के घरों में आगजनी कर लूटपाट मचाई थी।

जिसके चलते गांव से कई लोग पलायन कर बाहर चले गए। कुछ महीनों बाद गांव के लोग लौट आए और हमलावरों व आगजनी करने वालों पर मामला दर्ज कराया था। इसी मामले में 4 फरवरी 2026 को बन्हेरी गांव में एक गोलीकांड हुआ था।

जिसमें फरियादी अजब सिंह रावत को पेट और कमर के बीच गोली लगी थी। जिसका आरोप उसने दूसरे पक्ष पर लगाया था। इस मामले में जब ग्वालियर पुलिस ने पड़ताल की तो मामला फर्जी निकला था। पिछले सप्ताह पुलिस ने फर्जी हत्या के प्रयास के मामले का खुलासा करते हुए फरियादी अजब सिंह और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

बार-बार बुलाया ग्वालियर एसपी कोर्ट नहीं पहुंचे, समन जारी

फर्जी गोली कांड के आरोपियों ने जिला न्यायालय में जमानत आवेदन लगाया। आवेदन में तर्क दिया कि घटना को फर्जी बताते हुए फरियादी व गवाहों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसकी कोर्ट से इजाजत तक भी नहीं ली और न नई एफआईआर की। इस मामले पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और जांच अधिकारी को तलब किया, लेकिन जांच अधिकारी नहीं आए।

इसके बाद अपर लोक अभियोजक ने पुलिस अधीक्षक को फोन किया, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने फोन नहीं उठाया। इसको लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई और पुलिस अधीक्षक को तलब किया।

पुलिस अधीक्षक ने पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को भेज दिया, लेकिन कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को वापस लौटा दिया। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को समन जारी करते हुए दोपहर 2:50 बजे उपस्थित रहने के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक कोर्ट में नहीं आए।

कोर्ट के अधिकारों का पुलिस के उपयोग करने पर नाराजगी

कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को उपस्थिति के लिए समन जारी किया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में समन भेजा गया, लेकिन स्टेनो ने लेने से मना कर दिया। इसके बाद कोर्ट से वाट्सएप पर समन भेजा गया। इसको को समन तामील मानी गई। दोपहर 3:10 बजे पुलिस अधीक्षक की ओर से संदेश आया कि वह भितरवार में निरीक्षण के लिए आए हैं।

शाम 4 बजे मैसेज आया कि आगजनी की घटना हुई थी। उसका भी मौका देखने गए हैं। व्यस्तता के कारण नहीं आ पा रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने जिला अभियोजन अधिकारी को बुलाया। उनसे कहा कि इन्हें कानून समझाइए। कानून में क्या लिखा है। क्या कर रहे हैं। यह पहला केस नहीं है। कई गोलीकांड में उन्होंने ऐसा ही किया है और यह अब परंपरा सी बन गई है। पुलिस अब कोर्ट के अधिकारों का उपयोग करने लगी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button