पं.हरिप्रसाद चौरसिया जिससे प्रभावित थे, अब वह बिस्तर पर:हादसे ने छीनी इंदौर के बांसुरी वादक वैभव की धुन

मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया भी इंदौर के जिस उभरते कलाकार के मुरीद थे, अब उसकी जिंदगी बिस्तर पर कट रही है। ट्रक की टक्कर से उसके सिर में गंभीर चोट लगी, जिससे उसने अपना मानसिक संतुलन खो दिया।
शरीर के कई हिस्सों में गहरी चोटों के कारण वह पिछले आठ साल से बिस्तर पर है और पूरी तरह परिवार पर निर्भर हो चुका है। हालत इतनी गंभीर है कि वह अब किसी को पहचान भी नहीं पाता। कभी बांसुरी बजाने में माहिर यह छात्र अब अपनी ही दुनिया में खो गया है।
इस मामले में कोर्ट ने ट्रक की बीमा कंपनी को 59 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है, जो ब्याज सहित करीब 85 लाख रुपए बनता है। यह हादसा 8 जुलाई 2018 को हुआ था। इंदौर के पंचवटी नगर निवासी 18 वर्षीय वैभव त्रिवेदी बाइक से देपालपुर से इंदौर आ रहा था। तभी रॉन्ग साइड से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।
हादसे में उसके सिर, हाथ-पैर, पीठ-पेट और कमर सहित कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह डेढ़ महीने तक इलाजरत रहा।
बिस्तर पर पड़े रहकर सिर्फ देख सकता है, सुध-बुध नहीं
इलाज के दौरान उसके सिर के ऑपरेशन हुए। साथ ही बाएं पैर का ऑपरेशन कर रॉड डाली गई। साथ ही जबड़े का भी ऑपरेशन हुआ, लेकिन वह बिस्तर पर ही है। ऐसी हालत में वह सिर्फ देख ही सकता है, जबकि परिवार के इक्का-दुक्का लोगों को छोड़कर किसी को नहीं पहचान पाता।
डॉक्टरों का कहना है कि उसकी ऐसी स्थिति अब स्थायी ही रहेगी। वैभव एनिमेशन का कोर्स करने के साथ ट्यूशन पढ़ाता था जिससे उसे 10 हजार रुपए मिलते थे।
बीमा कंपनी बोली- ड्राइवर के पास नहीं था वैध लाइसेंस
हादसे के बाद पीड़ित छात्र के पिता सुरेंद्र त्रिवेदी ने 7 मार्च 2019 को जिला कोर्ट में मुआवजे के लिए केस दायर किया। उन्होंने करीब 79 लाख रुपए के मुआवजे की मांग की।
इस केस में ट्रक ड्राइवर योगेश वर्मा (निवासी बजरंग नगर, इंदौर), ट्रक मालिक मेहमूद खान (निवासी चंदन नगर) और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया।
मामले में बीमा कंपनी की ओर से यह दलील दी गई कि ट्रक ड्राइवर के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए कंपनी इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है।
त्रिवेदी की ओर से एडवोकेट अरुण त्रिपाठी ने ये तर्क रखे
- दुर्घटना में घायल छात्र वैभव को तीन बार अलग-अलग दौर में सुयश हॉस्पिटल में एडमिट किया जबकि इसके बाद सरकारी एमवाय हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। बताया गया कि उसकी स्थिति इतनी खराब थी कि भोजन देने के लिए पेट में नली डालने का ऑपरेशन भी किया गया।
- बताया गया कि वैभव को औथी बार एमवाय हॉस्पिटल से 16 अक्टूबर 2018 को एडमिट कर 19 अक्टूबर 2018 को डिस्चार्ज किया गया। उसके बाद से वह दूसरों पर आश्रित है। वैभव खुद खाने-पीने, कपड़े बदलने, यूरिन और शौच के लिए बताने में असमर्थ है। ऐसी स्थिति स्थायी है।
- उसके शरीर का एक हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त है, जबकि दूसरा पैर फ्रेक्चर था। उसे दो साल तक फिजियोथैरेपी दी गई लेकिन सुधार नहीं होने से बंद कर दी गई। इस दौरान फिजियोथैरेपिस्ट को हर विजिट पर 300 रु. दिए गए।
- बताया गया कि डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक निर्योग्यता 80% बताई है। अभी परिवार उसकी सेवा करता है। उसे जीवन पर्यंत सहायक की जरूरत होगी, क्योंकि वह किसी भी तरीके से संवाद करने में असमर्थ है।
कोर्ट ने कहा- बीमा कंपनी 59 लाख रुपए अदा करे
एडवोकेट त्रिपाठी ने सुनवाई के दौरान न्याय दृष्टांत ऐसे 10 से ज्यादा केसों का हवाला दिया। करीब 8 साल तक चली सुनवाई में कोर्ट ने 19 फरवरी को फैसला सुनाया। मामले में कोर्ट नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह वैभव के पिता को मुआवजे के 59 लाख रुपए अदा करे। यह राशि अलग-अलग मदों में हैं।
- शारीरिक पीड़ा, कष्ट, सुविधा हानि के लिए 5 लाख रुपए।
- इलाज में हुआ खर्चा, भविष्य में होने वाला खर्च और वैभव को लाने-ले जाने के लिए लगने वाला खर्च 15.99 लाख रुपए।
- जीवन पर्यंत सहायक के लिए 10.80 लाख रुपए।
- विशेष आहार के लिए खर्च हुआ राशि 54 हजार रुपए।
- स्थायी अपंगता के लिए 26.70 लाख रुपए।
इस तरह 59.04 लाख रुपए का मुआवजा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ट्रक मालिक और ड्राइवर से दिलाने का आदेश दिया। सात सालों में (कोर्ट में केस दाखिल होने से फैसले तक) यह राशि 85 लाख रु. होती है। यह इंश्योरेंस कंपनी को यह राशि 30 दिनों में अधिकरण में जमा करानी होगी।

इन तर्कों और तथ्यों के कारण केस को मिली मजबूती
- डॉ. उमेश जो मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर हैं, जिन्होंने सिर की चोट में 80% स्थायी अक्षमता को लेकर साक्ष्य पेश करने के साथ बयान दिए।
- डॉ. परेश सोधिया (अर्थोपैडिक) द्वारा किए गए इलाज और संबंधित दस्तावेज ठोस आधार रहे।
- डॉ. ब्रजमोहन जो 2018 से वैभव फिजियोथेरेपी कर रहे हैं. उनके बयान भी अहम रहे।
- प्रत्यक्षदर्शी उत्तम परिहार जिन्होंने एक्सीडेंट होते हुए देखा था, उनकी गवाही से केस को मिली मजबूती।
वैभव से पं. हरिप्रसाद चौरसिया भी बड़े प्रभावित थे
वैभव के परिवार में पिता, मां ज्योति, तीन बड़ी बहनें राधिका, मोनिका और मिनाक्षी हैं। राधिका और मोनिका की शादी हो चुकी है। पिता
सुरेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि वैभव परिवार में सबसे छोटा और चहेता है। दुर्घटना के बाद से वह बिस्तर पर ही है। वह परिवार के लोगों को भी बमुश्किल पहचान पाता है और एक-दो शब्द ही बोल पाता है।
इसके अलावा उसके किसी बात की सुध-बुध नहीं है।


