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लद्दाख में लापता दोस्तों ने पत्थर पर लिखा..हेल्प मी:गर्म पानी पीकर भूख मिटाई, सैटेलाइट से मिली लोकेशन; आगरा से घूमने गए दोस्तों की आपबीती

‘वह 3 रातें भूलने वाली नहीं हैं। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। जहां तक नजर जा रही थी, वहां तक बर्फ की चादर ही दिखाई दे रही थी। गर्म पानी पीकर भूख मिटाई। हाड़ कंपा देने वाली ठंड को दूर करने के लिए कार का हीटर चलाया। कार में जो बिस्कुट और चिप्स पड़े थे, उसी से काम चलाया।’

यह कहना है लद्दाख में गायब हुए आगरा के उन चारों दोस्तों की, जिन्हें अब सकुशल बरामद कर लिया गया है। आगरा से लद्दाख में घूमने गए वह चारों दोस्त मिल गए हैं, जो 2 दिन और 3 रात तक लापता रहे। उनकी जानकारी मिलने पर उनके परिवार के लोग लेह में उनके पास पहुंच गए हैं। वे सभी 15 जनवरी को आगरा के लिए रवाना होंगे। घर पर उन सभी का इंतजार हो रहा है।

परिवार को अपने पास देखकर उन चारों दोस्तों ने लापता होने से जुड़ी पल-पल की जानकारी साझा की। खराब मौसम, अंजान जगह और दूर-दूर तक विराना में 2 दिन और 3 रात किस खौफनाक तरीके से गुजारीं, यह सुनकर परिजनों के रौंगटे खड़े हो गए।

घटनास्थल की 4 तस्वीर देखिए…

तलाश के दौरान लद्दाख पुलिस को कार मेन रोड से 20 फीट नीचे मिली।

कार दिखते ही पुलिस मौके पर पहुंची। उनकी कार को रिकवर किया गया।सड़क पर बर्फ जमा थी, फिसलकर मुख्य सड़क से नीचे कार इस हालत में मिली।

अब सिलसिलेवार पूरी कहानी पढ़िए…

आगरा के मधुनगर निवासी शिवम चौधरी अपने तीन दोस्त जयवीर चौधरी, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार के साथ लद्दाख की ट्रिप पर गए थे। यह सभी आगरा से 6 जनवरी को कार से घूमने निकले। चारों लद्दाख भी पहुंच गए। वहां उन्होंने नया मोबाइल नंबर लिया। परिवार से बात की। अगले दो दिनों तक बात करते रहे।

9 जनवरी को सभी लेह के पेंगोंग झील पर थे। वहां से उन्होंने वीडियो कॉल से घर पर बात भी की। उसके बाद से उनका संपर्क टूट गया। घर वालों ने कई बार उसी नंबर पर कांटेक्ट किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। परेशान होकर घर वालों ने 11 जनवरी को सदर थाना में मिसिंग शिकायत दर्ज कराई।

शिवम चौधरी के पिता दौलताराम चौधरी ने बताया- चारों में से किसी से संपर्क नहीं होने पर पुलिस को जानकारी दी। उसके बाद उन सभी की लोकेशन मिल गई। वह जिस हालत में मिले वह बहुत खौफनाक है।

काली टी-शर्ट में यश मित्तल और शर्ट पहने शिवम चौधरी।

गुलमर्ग, सोनमर्ग होते हुए लद्दाख पहुंचे शिवम चौधरी, जयवीर सिंह, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार आगरा से गुलमर्ग गए। वहां से सोनमर्ग होते हुए पैंगोंग झील पहुंचे। 9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे चारों ने वीडियो कॉल कर अपने परिवारीजनों को वहां का नजारा दिखाया। इसके बाद खराब मौसम में नेटवर्क बंद हो जाने से उनका परिजनों से संपर्क टूट गया।

दो दिन तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर चारों के घर वाले परेशान हो गए। शिवम के पिता राम चौधरी ने लोकल पुलिस के अलावा सांसद, पूर्व विधायकों को बताया। उसके बाद रक्षा और गृह मंत्रालय की मदद मांगी गई। सूचना पर सेना ने जानकारी जुटाई।

सैटेलाइट से मिली गाड़ी की लोकेशन सैटेलाइट से युवकों की गाड़ी की जानकारी मिली। गाड़ी लेह से 125 किलोमीटर दूर मनाली मार्ग के पास पांग में थी। फिर सेना और पुलिस इन युवकों तक पहुंच गई। तत्काल युवकों के सुरक्षित मिलने की खबर शिवम के पिता को दी गई। उसके बाद वह परिवार के अन्य 8 लोगों के साथ दिल्ली होते फ्लाइट से लेह पहुंच गए।

मनाली के लिए निकले, रास्ता भटके चारों की सकुशल बरामदगी के बाद लद्दाख पुलिस ने एक वीडियो जारी किया। उसी में बताया कि पिछले तीन दिन चारों दोस्तों ने जद्दोजहद और संघर्ष के बीच गुजारा। पहले रास्ता भटके, फिर गाड़ी 20 फिट गहराई में चली गई। उसका डीजल खत्म हो गया तो 20 किलोमीटर पैदल चले। इसी बीच पुलिस उन तक पहुंच गई।

बाएं सुधांशु फौजदार और दाएं जयवीर चौधरी

बर्फबारी के बीच कैसे गुजारीं 3 रात, जानिए शिवम और जयवीर आपस में रिश्तेदार हैं। इनको ढूंढने लेह पहुंचे शिवम के ताऊ बेटे चंद्रेश चौधरी से दैनिक भास्कर ने फोन पर बात की। उन्होंने बताया-चारों सकुशल मिल गए हैं। 15 जनवरी को आगरा के लिए वापसी करेंगे। चारों दोस्तों ने चंद्रेश चौधरी से जो बताया वह उन्होंने दैनिक भास्कर से साझा किया।

9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे चारों पैंगोंग झील पर थे। रात में आसपास ही रुकने का प्लान था। फिर सोचा कि लेह में रुक जाएंगे, लेकिन बाद में तय हुआ कि सीधे मनाली चलेंगे। रास्ते में एक व्यक्ति से पूछा तो उसने रास्ता तो बताया, लेकिन सभी युवकों को गूगल मैप लगाने की सलाह दी। उसी के आधार पर वह आगे बढ़ने लगे।

लेह से लगभग 125 किलोमीटर ही पहुंचे थे। उस समय रात के लगभग ढाई बज रहे थे। सड़क पर बर्फ ही बर्फ थी। रास्ता पूरी तरह से बंद था। ये क्षेत्र सरचू से 40 किलोमीटर पहले था। वहां तक पहुंचना भी मुश्किल था।

ऐसे में कार को सड़क पर ही रोक कर सुबह का इंतजार करते रहे। मोबाइल का नेटवर्क न होने से किसी से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। जैसे-तैसे रात गुजारी। उसके बाद 10 जनवरी को भी यही हाल रहा।

कभी नहीं भूल सकते वो रातें उन्होंने परिजनों को बताया-वो 3 रातें हम कभी नहीं भूल सकते। आसपास कोई नजर नहीं आ रहा था। कार से बाहर निकलकर देखा ता दूर-दूर तक एक इंसान तक नजर नहीं आया। जहां तक हमारी नजर आ रही थी, वहां सिर्फ बर्फ ही बर्फ दिखाई दे रही थी। ऐसे में डर भी लग रहा था।

एक-दूसरे से बातें कर समय काटा। इन चारों के पास कार में जो सबसे खास चीज थी, वह चूल्हे वाला छोटा सिलेंडर था। जिससे पानी गर्म कर-कर पीते रहे और पास में रखे कुछ चिप्स और बिस्किट खाते रहे।

पत्थर पर लिखा दिया ‘हेल्प मी’ जब आगे-पीछे जाने का कोई उपाय न सूझा तो कार में ही सुबह से लेकर रात गुजारी। ठंड लगने पर बीच-बीच में कार का हीटर चलाते रहे। 11 जनवरी को सुबह गाड़ी से बाहर आए, लेकिन पहले जैसी ही स्थिति होने के कारण कोई फायदा न हुआ। फिर तय किया कि वापस लेह की तरफ जितना चल सकते हैं, पैदल ही चलेंगे।

कार को वहीं छोड़ दिया। सड़क किनारे पड़े एक पत्थर को उठाकर बीच में रखा और उस पर ‘हेल्प मी’ लिख दिया। उसके बाद लगभग 15 किलोमीटर पैदल चले। वहां एक झोपड़ी मिली। उसमें 11 जनवरी की पूरी रात काटी।चारों दोस्तों के परिवार के लोग आगरा से लेह पहुंच गए। मुलाकात होने पर राहत की सांस ली।

अब जानिए 9 से 13 जनवरी के बीच क्या-क्या हुआ…

9 जनवरी: शाम 5 बजे चारों युवकों ने अपने परिजनों से बात की। इसके बाद ये लेह के लिए निकल गए। वहां पर खारू के पास इन्हें मनाली का बोर्ड दिखाता है। ये उस रास्ते पर चलने लगते हैं।

10 जनवरी: पंग में ही रुकते हैं।

11 जनवरी: मनाली के लिए निकलते हैं। वहां आगे रास्ता बंद होता है। ये लोग सरचू से आगे निकलकर फिर वापस लौटते हैं। वहां पर नाकीला के पास बर्फ से इनकी गाड़ी 20 फीट नीचे गिर जाती है। बस इनका नसीब अच्छा था कि गाड़ी पलटी नहीं। ये लोग बर्फ के अंदर गाड़ी का हीटर चलाकर बैठे रहते हैं।

12 जनवरी: को भी इस तरह हीटर के ही सहारे गुजरा। इसके बाद जब गाड़ी का डीजल खत्म हो जाता है तो ये लोग प्लान करते हैं। रास्ते में कुछ झोपड़ी थीं। वहां पैदल ही चलते हैं।

13 जनवरी: करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर व्हिस्की नाला के पास झोपड़ी में रुकते हैं। इस बीच लद्दाख पुलिस भी इनको तलाशते हुए वहां पर पहुंच जाती है। सभी को रेस्क्यू कर वापस लेह लाया गया।

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