उत्तर प्रदेश

कानपुर गैंगरेप पीड़िता बोली- यूट्यूबर ने मुंह दबाया:दरोगा ने पैर पकड़े, 45 मिनट तक दरिंदगी की; योगी ने अफसरों को लगाई फटकार

मैं टॉयलेट के लिए घर के पीछे 200 मीटर दूर तालाब तक गई थी। वहां से कुछ दूर एक काले रंग की स्कॉर्पियो रुकी, 2 लोग उतरे और मुझे खींचकर गाड़ी के अंदर ले जाने लगे।

वर्दी पहने शख्स ने मेरे पैर पकड़ लिए। जबकि दूसरे व्यक्ति ने मेरा मुंह दबा लिया, हाथ जकड़ लिए। मैं कुछ कर नहीं पा रही थी। खींचकर स्कॉर्पियो में लेकर गए, वर्दी पहना शख्स मुझे छोड़कर ड्राइविंग शीट पर बैठ गया।

ये सब बताते हुए गैंगरेप पीड़िता थोड़ा ठहर जाती है, फिर संभलकर धीरे-धीरे आपबीती बताने लगती है। कहा- वो 5 जनवरी की रात थी, कोई 9.30 बजे होंगे। मुझे गाड़ी में खींचे जाने के बाद धीरे-धीरे गाड़ी चलने लगती है, वो दोनों 10 मिनट गाड़ी चलाते, फिर रोक देते। मैंने पूछा- कौन हो… कहां ले जा रहे हो? तुम तो पुलिस वाले हो। इस पर मुझे तेज थप्पड़ मारा। बोले- बैठी रहो, नहीं तो मार डालेंगे। मैं सहम गई, कुछ समझ नहीं आ रहा था।

फिर गाड़ी को रेलवे पटरी के पास लेकर जाकर रोक दिया। मुझे खींचकर नीचे उतारा। वहां दोनों ने मेरे साथ रेप किया। ये सब 45 मिनट तक चलता रहा। फिर वो दोनों मुझे छोड़कर भाग निकले।

उधर, इस घटना का CM योगी ने संज्ञान लिया है। अफसरों को फटकार लगाई है। कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया- मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जल्द से जल्द आरोपी दरोगा को अरेस्ट करके जेल भेजा जाए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

पीड़िता के घर के रास्ते पर पुलिस तैनात दिखी। बिना बातचीत के अनजान लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा था।

कानपुर के उस गांव तक हमारी टीम खेतों के बीच पगडंडी पर चलते हुए पहुंची। जिस झोपड़ीनुमा घर में पीड़िता रहती है, वो बांस और खपरैल से बनाई गई थी। देखने से ही लग रहा था कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। घर पहुंचने के बाद परिवार के लोग अंदर कमरे में लेकर गए।

वहां कोने में डरी सहमी लड़की बैठी दिखी। उससे मिलने के लिए गांव के लोग आ रहे थे। सब उसको दिलासा दे रहे थे। गैंगरेप के आरोपी दरोगा और यूट्यूबर के लिए लोगों में गुस्सा था।

परिजनों ने बताया कि पीड़िता सदमे में है, ठीक से खाना नहीं खा रही है। दिन में 1 रोटी ही खाई। छोटे घर में लोग ज्यादा थे, पीड़िता अकेला कोना ढूंढ रही थी, घर के बरामदे में बैठे पिता गांव के लोगों को रुंधे गले से बेटी के साथ हुई दरिंदगी के बारे में बता रहे थे।

इस घर से 20 कदम की दूरी पर एक दरोगा, महिला कॉन्स्टेबल समेत 2 पुरुष कॉन्स्टेबल मौजूद थे, गांव के लोगों ने बताया कि इन्हें सुरक्षा के लिए रखा गया है, क्योंकि आरोपियों में एक दरोगा है।

गांव की बेटी के साथ हुई दरिंदगी के बाद लोगों में गुस्सा और डर दोनों देखने को मिला, घर के बाहर दहलीज पर बैठी महिलाएं खुद की और अपनी बेटियों की सुरक्षा पर बातचीत करती दिखी।

पिता बोले- एक्सीडेंट के बाद चल नहीं सकता घर के बरामदे में बैठे पिता कहते हैं- मैं वाटर आरओ बनाने का काम करता था। 2024 में फैजाबाद से लौटने के दौरान मेरा उन्नाव में एक्सीडेंट हो गया। जिससे दोनों पैर बेकार हो गए। सड़क हादसे के गम में पत्नी की मौत हो गई। जिसके बाद मैं अपने 2 बेटे और 2 बेटियों के साथ रहता हूं। मां की मौत के बाद पीड़िता ने भी पढ़ाई छोड़कर घर की जिम्मेदारियों का बोझ उठा लिया।

पीड़िता से हमने बात करने का प्रयास किया तो पहले तो वह सहमी, फिर फफकते हुए कहा- वह लोग मेरे परिवार को मार डालेंगे। हमनें कहा- नहीं, पुलिस सुरक्षा है। आप बताइए, क्या हुआ था? उसने कहा- गाड़ी में खींचने के बाद जब मैं चिल्लाया, तो दरोगा ने आंख दिखाते हुए कहा था- अगर ज्यादा चिल्लाएगी, तो मार डालूंगा।

रेल की पटरी के पास लेकर जाने के बाद मेरे साथ रेप पहले दरोगा ने नहीं किया, पहले उस लड़के ने किया। फिर दरोगा भी आ गया। मेरे चीखने पर मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। मेरी जिंदगी बर्बाद करने के बाद वो दोनों भाग गए।

दरोगा थाने से भाग गया, वो लोग पकड़ नहीं पाए रोते-रोते रात में मैं घर पहुंची, जहां बड़े भाई को सब बताया। तब उन्होंने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मेरा वीडियो बनाया और सुबह हम लोग चौकी गए। चौकी में शिवबरन पहले से बैठा हुआ था, हमने उसे पहचान लिया।

उसने पूछा कि हम थे क्या? तो हमने कहा- हां… तुम ही तो थे। दरोगा का नाम हमको नहीं पता था, वहीं चौकी में जब सब पुलिस वालों के बारे में बताया गया, तब हमने दरोगा को भी पहचान लिया। फिर हम लोग थाने पहुंचे। दरोगा अमित कुमार मौर्या वहां से भाग गया, पुलिसवाले उसे पकड़ नहीं पाए।

रुक-रुक कर चल रही थी कार, दरोगा ने धमकाया वहीं पीड़िता के भाई ने बताया- हम दोनों भाई बहन को ढूंढते हुए पुलिया के पास पहुंचे, मगर वो वहां नहीं मिली। करीब आधा किलोमीटर आगे और गए तो एक स्कॉर्पियो और एक अपाचे बाइक खड़ी दिखी। गाड़ी 20 कदम चलती फिर रुक जाती, बार-बार गाड़ी चलने और रुकने पर हमें शक हुआ।

करीब 45 मिनट बाद गाड़ी हमारी घर के पास बनी पुलिया की तरफ आकर रुक गई। शिवबरन और पुलिस वाला गाड़ी में था। उनसे हमने पूछा कि आप यहां क्या कर रहे, तो पुलिसवाले बोले कि उतर कर आऊं क्या? हमने कहा कि हमारी बहन खो गई है, हम उसी को ढूंढ रहे।

फिर शिवबरन ने कहा- जाओ तुम लोग, तो हम लोग घर आ गए। कुछ देर के बाद बहन घर लौटकर आ गई, तब उसने पूरी बात बताई। हमने रात में ही डायल 112 पर फोन मिलाया, तब पुलिस आ गई। सुबह चौकी पहुंचे, शिवबरन चौकी पहुंचने से पहले मुझसे मिला। बोला कि अगर लड़की किसी को पहचानेगी, तो हम तुम्हें चौकी पर ही मार देंगे।

चौकी में शिवबरन मौजूद मिला, तो बहन बोली- भैया इसी ने गलत काम किया है। पुलिस वाले हम लोगों को थाने लाने लगे, तो हमने कहा कि हमारे पास बिल्कुल रुपए नहीं हैं। हम कुछ देर के लिए घर आ गए। इस दौरान शिवबरन के भाइयों ने हमें घेर लिया और कहा- अगर फर्जी नाम लिखाओगे, तुम थाने नहीं पहुंच पाओगे। यह कहते ही वह लोग थप्पड़ मारने लगे। हमने पुलिस को फोन किया, जिस पर पुलिस आई और हमें थाने लेकर पहुंची।

थाने में बार-बार अलग-अलग पुलिसवाले पूछताछ करते रहे, फिर मुकदमा लिखा गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद शिवबरन के भाई ने 5-10 लाख लेकर समझौता करने की बात कही।

 

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