बाल कलाकारों को मिला दिग्गज कलाकारों का साथ:एटेलियर्स हब की वार्षिक कला प्रदर्शनी की शुरुआत, पीढ़ियों के बीच कला संवाद को मजबूती प्रदान करने के लिए पहल

एटेलियर्स हब कला संस्थान की द्वितीय चार दिवसीय वार्षिक कला प्रदर्शनी का शुभारंभ जवाहर कला केन्द्र स्थित सुकृति एवं सुरेख कला दीर्घा में हुआ। 9 से 12 जनवरी 2026 तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में नई पीढ़ी के उभरते कलाकारों से लेकर वरिष्ठ और अनुभवी कलाकारों की रचनाएं एक ही मंच पर देखने को मिल रही हैं, जिससे कला प्रेमियों में खास उत्साह नजर आ रहा है।
इस प्रदर्शनी में करीब 20 युवा और वरिष्ठ कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो चित्रकला सहित विभिन्न कला माध्यमों और शैलियों में सृजित हैं। प्रदर्शनी की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें प्रतिभा के लिए आयु की कोई सीमा नहीं रखी गई है। कक्षा 6 के विद्यार्थियों से लेकर 50 वर्ष से अधिक आयु के कलाकारों तक को समान अवसर प्रदान किया गया है। यह पहल पीढ़ियों के बीच कला संवाद को मजबूती देती नजर आ रही है।
प्रदर्शित सभी कृतियां एटेलियर्स हब के मेंटर एवं प्रसिद्ध चित्रकार दुर्गेश अटल और संस्थान की संस्थापक हेमल कंकरवाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई हैं। प्रदर्शनी में विषयवस्तु, रंगों के प्रयोग और तकनीकी विविधता दर्शकों को आकर्षित कर रही है।

लोक क्वीन सीमा मिश्रा ने किया उद्घाटन
प्रदर्शनी का उद्घाटन भारत की प्रसिद्ध लोक गायिका और लोक क्वीन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात सीमा मिश्रा ने किया। विशेष अतिथियों के रूप में वरिष्ठ कलाकार नाथूलाल वर्मा, जयपुर विकास प्राधिकरण के सचिव, आईएएस एवं प्रसिद्ध लेखक-कवि निशांत जैन और सुप्रसिद्ध कलाकार गोपाल स्वामी खेतांची मौजूद रहे। अतिथियों ने कलाकारों की रचनाओं की सराहना करते हुए इस तरह के आयोजनों को कला के विकास के लिए आवश्यक बताया।

10 जनवरी को होगा विशेष टॉक शो प्रदर्शनी के तहत 10 जनवरी को एक विशेष टॉक शो का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित कलाकारों के बीच कला से जुड़े विषयों पर प्रश्नोत्तर और संवाद होगा। यह सत्र युवा कलाकारों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का माध्यम बनेगा।
एटेलियर्स हब की संस्थापक हेमल कंकरवाल और मेंटर दुर्गेश अटल ने बताया कि यह आयोजन उभरते कलाकारों को प्रोत्साहन देने और कला संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि इस तरह के मंच कलाकारों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और कला के प्रति नई सोच विकसित करते हैं।



