दो बार बची, तीसरे ट्रैप में पकड़ी गई महिला IRS:लेन-देन वाली डायरी-लैपटॉप से खुलेंगे राज; झांसी में CBI ने घरों को खंगाला

झांसी में 70 लाख की रिश्वत लेने वाली सेंट्रल जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर (IRS अफसर) प्रभा भंडारी समेत 3 अफसरों को पकड़ने के लिए CBI को काफी मेहनत करनी पड़ी। पहले दो बार ट्रैप की कार्रवाई फेल हो गई थी, फिर तीसरी बार सीबीआई ने ठोस रणनीति बनाई और तीनों अफसरों समेत 5 आरोपियों को पकड़ा।
सभी के घरों में तलाशी ली गई। इस दौरान आरोपी सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी के घर से कई गोपनीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़ी 3 डायरियां बरामद हुईं। इनमें सेंट्रल जीएसटी ऑफिस में चल रहे पूरे खेल का राज छिपा है।
सीबीआई ने 30 दिसंबर को 70 लाख की घूस लेते सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनके साथ दुर्गा हार्डवेयर फर्म के मालिक राजू मंगनानी और वकील नरेश को भी अरेस्ट किया गया था। बाद में दिल्ली से डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को गिरफ्तार किया गया।

सर्राफा बंधुओं पर कार्रवाई के बाद अनिल-अजय रडार पर आए
21 नवंबर को सेंट्रल जीएसटी ने सर्राफा बाजार स्थित जाने-माने सर्राफा कारोबारी के यहां छापा मारा था। यहां टैक्स का घालमेल मिला था। जितना टर्नओवर कागजों में दिखाया गया था, उससे कम टैक्स जमा पाया गया। कार्रवाई के दौरान खुद डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी मौजूद थे। टीम कई दस्तावेज भी अपने साथ ले गई थी।
इस मामले में सर्राफा कारोबारी पर मोटा जुर्माना लगाने की कवायद शुरू हो गई थी। इसके कुछ दिन बाद 5 दिसंबर को उनके चचेरे भाई के ज्वेलर्स शोरूम में जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) टीम ने छापा मारा। यहां सोना तस्करी का मामला सामने आया था।
सूत्रों का कहना था कि इसके बाद सर्राफा बंधुओं ने मामला निपटाने के लिए अनिल तिवारी से संपर्क साधा। अनिल ने मदद करने का भरोसा दिलाते हुए उन्हें लखनऊ बुलाया और मोटी रकम की मांग की। इस सौदे की भनक सीबीआई को लग गई थी।
अनिल तिवारी लखनऊ में थे, लेकिन पैसों का इंतजाम न हो पाने से सर्राफा कारोबारी नहीं पहुंचे। इस वजह से सीबीआई वहां कार्रवाई नहीं कर सकी। इसके बाद झांसी में भी इन दोनों को पकड़ने की कोशिश हुई। तीसरी बार जाकर अनिल और अजय शर्मा ट्रैप में आ गए।
एक पद पर दो अधिकारी तैनात थे सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी सेंट्रल जीएसटी की डिवीजन प्रिवेंटिव टीम में तैनात था। झांसी में इसका सिर्फ एक पद है, लेकिन अनिल ने अपने संपर्कों के सहारे अजय शर्मा को भी यहीं तैनात करा रखा था। अनिल तिवारी के रसूख का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसने नौकरी के करीब 15-20 साल झांसी में ही बिताए।
महज डेढ़ साल के लिए उसका तबादला आगरा हुआ था, लेकिन अपने संपर्कों की बदौलत वह फिर झांसी लौट आया। यहां अजय शर्मा के साथ मिलकर कारोबारियों के यहां छापे पड़ने के बाद उनसे सौदेबाजी करता था। झांसी, उरई, ललितपुर और हमीरपुर के बड़े कारोबारियों से उसकी सीधी डीलिंग थी। हर महीने करीब 3-4 करोड़ रुपए की उगाही होती थी।
इसका पूरा हिसाब-किताब अनिल अपनी डायरियों में रखता था, जिन्हें सीबीआई अपने साथ ले गई है। अनिल ने पत्नी और भाई के नाम से झांसी, लखनऊ और दिल्ली में करोड़ों रुपए की संपत्तियों में निवेश कर रखा है। अनिल के अलावा सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के घर से भी डायरी और लैपटॉप बरामद किए हैं। सीबीआई इनकी भी जांच कर रही है। इनके जरिए भी कई राज सामने आ सकते हैं।

160 अफसरों की प्रमोशन लिस्ट रुकी
2016 बैच की आईआरएस अफसर प्रभा भंडारी का प्रमोशन 1 जनवरी 2026 को जॉइंट कमिश्नर पद पर होना था। लेकिन सीबीआई की गिरफ्त में आने के बाद उनके साथ 160 अफसरों की प्रमोशन सूची सीबीआईसी बोर्ड ने रोक दी। प्रभा भंडारी के साथी अफसरों ने बताया कि प्रमोशन सूची में प्रभा का नाम शामिल था। इसी वजह से सूची जारी नहीं हो सकी।
प्रमोशन के बाद उनकी मनचाही जगह पर तैनाती होनी थी। इससे पहले पति की बबीना में तैनाती के चलते प्रभा की झांसी में पोस्टिंग हुई थी। प्रमोशन के बाद जम्मू में तैनाती की तैयारी थी। यह प्रमोशन सूची गुरुवार को जारी होनी थी, लेकिन उससे पहले ही प्रभा घूसखोरी के मामले में फंस गईं। अब प्रमोशन सूची पर भी रोक लगा दी गई
4 पॉइंट में समझिए पूरा मामला
- 18 दिसंबर को डिप्टी कमिश्नर प्रभारी भंडारी के नेतृत्व में जीएसटी टीम ने झोकन बाग स्थित जय अम्बे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदामों पर छापा मारा। यहां बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी गई। केस को निपटाने के लिए फर्म मालिकों और सेंट्रल जीएसटी के अफसरों के बीच बड़ी डील हो चुकी थी।
- इसकी खबर सीबीआई तक पहुंची तो सीबीआई ने पल-पल का इनपुट जुटाना शुरू किया। पता चला- जब दोनों फर्मों पर छापा पड़ा तो मालिकों ने मामला निपटाने के लिए अधिवक्ता नरेश गुप्ता से बात की। नरेश ने सुपरिटेंडेंट अनिल कुमार से बात की और रिश्वत लेकर मामले को निपटाने की पेशकश की।
- तब अनिल बोला- बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी है। मेडम प्रभा भंडारी भी तलाशी स्थल पर मौजूद हैं। फिर भी मदद करेंगे। फर्म मालिक लोकेश और राजू मंगतानी ने सुपरिटेंडेंट अनिल और फिर अजय के आवास पर मीटिंग की। जहां पूरे मामले को निपटाने का सौदा हुआ। अफसरों ने डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी।
- फर्म मालिक ने रुपए कम करने के लिए कहा तो बोले कि मैडम ने रिश्वत की राशि कम करने के लिए मना कर दिया। पूरे डेढ़ करोड़ रुपए लगेंगे। 29 दिसंबर को नरेश ने राजू मंगनानी से कहा कि साहब को देने के लिए रुपए तैयार रखो। 30 दिसंबर को सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत 5 आरोपियों को अरेस्ट कर 1.60 करोड़ रुपए, भारी मात्रा में गहने, प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद किए।
सीबीआई के ट्रैप की पूरी कहानी
- मंगलवार को झांसी पहुंची CBI टीम: CBI टीम ने कार्रवाई के लिए मंगलवार को ही झांसी में डेरा डाल दिया था। टीम को मालूम चला था कि कार्रवाई रोकने की एवज में सेंट्रल जीएसटी अफसर लंबी रिश्वत लेने की फिराक में हैं। इनपुट मिला कि मंगलवार को घूस के 70 लाख रुपए अफसरों तक पहुंचने वाले हैं।
- दो सुपरिटेंडेंट और फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया: CBI की टीम के जाल में अफसर फंस गए। 70 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ अनिल तिवारी और अजय शर्मा को गिरफ्तार किया। साथ में फर्म के मालिक राजू मंगतानी और वकील नरेश कुमार गुप्ता को भी अरेस्ट किया गया।
- सुपरिटेंडेंट ने खोली डिप्टी कमिश्नर की पोल: सीबीआई ने सुपरिटेंडेंट से पूछताछ की तो बोले- प्रभा भंडारी के कहने पर रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था। मैडम ही मास्टरमाइंड हैं। मैडम को ये भी पता है कि आज पहली किस्त के तौर पर 70 लाख मिलने वाले हैं। तब सीबीआई अफसरों ने अपने सामने डिप्टी कमिश्नर को फोन कराया। कॉल को रिकॉर्ड भी किया।
- तलाशी में 90 लाख रुपए और मिले: इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली से प्रभा भंडारी को अरेस्ट किया। उनके घर और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने प्रभा भंडारी को गाजियाबाद कोर्ट में पेश कर रिमांड में लिया। फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। बाकी चार आरोपियों को झांसी कोर्ट में पेश करने के बाद लखनऊ लाया गया।
CBI की FIR में दो और कारोबारियों के नाम
खुलासा होने के बाद सीबीआई ने लखनऊ में 7 नामजद और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, जीएसटी सुपरिटेंडेंट सिविल लाइन निवासी अनिल तिवारी और शिवाजी नगर निवासी अजय शर्मा, सिविल लाइंस निवासी वकील नरेश कुमार गुप्ता और मयूर विहार कॉलानी निवासी जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी अरेस्ट हो चुके हैं।
इसके अलावा राजू का भाई तेजपाल मंगनानी और आवास विकास कॉलोनी-1 निवासी जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी को भी आरोपी बनाया गया है। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह कर रहे हैं। सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत दोनों सुपरिटेंडेंट की अकूत संपत्तियां खंगालना शुरू कर दिया है।