
ट्रांसजेंडर को लोग गलत नजरिए से देखते है। समाज आज भी उन्हें इतना महत्व नहीं देता है, लेकिन मैं हिम्मत नहीं हारूंगी। ट्रांसजेंडर होना भले ही मेरे लिए अभिशाप माना जाता रहा हो, लेकिन मैं अपने इस अभिशाप को खेल के दम पर वरदान सिद्ध करके रहूंगी।
यह कहना हैं राजस्थान की ट्रांसजेंडर खिलाड़ी रितिका सिंह(21) का। उनका दावा है कि वे देश की पहली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी है, जिन्होंने नेशनल लेवल पर हुई आईस स्टॉक गेम चैम्पियनशिप 2025 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा हैं।
टोंक के मालपुरा की रहने वाली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी रितिका सिंह ने समर आइस स्टॉक चैंपियनशिप 2025 में राजस्थान टीम की ओर से खेली थी, जिसमें उनके साथ राजस्थान में चार खिलाड़ी और भी शामिल थे। यह 21 नवंबर से 23 नवंबर तक आगरा में हुई थी।
फाइनल मुकाबले में गुजरात की टीम को 8 अंक से हराकर जीत हासिल की। इसके बाद सोमवार की दोपहर जयपुर पहुंचने पर सभी का जोरदार स्वागत किया गया।

माइनस टेम्प्रेचर में खेलते है, गुलमर्ग में भी जीत चुकी हैं मेडल आइस स्टॉक एक इंडोर गेम है, जो कड़कड़ाती ठंड में माइनस टेम्प्रेचर में खेला जाता है। इसमें ज्यादातर बर्फीले देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। रितिका 3 साल के खेल करियर में पहले भी नेशनल लेवल पर सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।
रितिका ने जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में 1 से 2 फरवरी तक हुई नेशनल आइस स्टॉक स्पोट्र्स चैंपियनशिप में 4 मेडल जीते थे। उन्हें इस प्रतियोगिता में इंडिविजुअल कॉम्पिटिशन के मुकाबलों में महिला वर्ग में एंट्री दी गई थी। अंडर-23 आयुवर्ग में इंडिविजुअल कॉम्पिटिशन के डिस्टेंस इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया।
इसी कॉम्पिटिशन के टीम इवेंट में राजस्थान की टीम से खेलते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया है। रितिका सिंह ने इसी तरह टारगेट इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। टीम इवेंट में भी ब्रॉन्ज मेडल हासिल करते हुए प्रतियोगिता में कुल 4 मेडल जीते थे।
जेंडर चेंज करवाने पर लोगों ने दिए ताने तो घर छोड़ा रितिका सिंह ने बताया- पिता शॉप-कीपर है और मां गृहिणी है। हम तीन भाई बहन है। इनमें एक बड़ा भाई है, फिर मैं हूं और तीसरे नंबर पर मेरी एक बहन है। बचपन में लड़के के रूप में 12वीं तक अपने गांव मालपुरा के स्कूल में पढ़ाई की थी। पेरेंट्स की सहमति से जेंडर चेंज करवा लिया, जब इस बात का गांव में लोगों को पता चला कि तो वो ताने देने लगे। इसके बाद मैंने मालपुरा छोड़ने का मानस बना लिया। 2021 में परिजनों से परमिशन लेकर जयपुर आ गई।
इसके बाद राजस्थानी फोक डांस भी सीखा और अब एनजीओ में राजस्थानी फोक डांस करती हूं और सिखाती भी हूं। फोक डांस से मेरा खर्चा चलता है। स्टेट रेनबो सोसाइटी में जुड़कर ट्रांसजेंडर्स से जुड़े मुद्दों पर भी काम करती हूं।
अब मेरा सपना है कि राजस्थान और देश का नाम इंटरनेशनल लेवल पर रोशन करूं, जिससे सभी गौरवान्वित महसूस कर सके।

यह रहे टीम में शामिल प्रतियोगिता में राजस्थान टीम में रितिका सिंह के अलावा 3 अन्य खिलाड़ी जयपुर की नंदनी, कोटा की अवनी और जयपुर की सिमरन शामिल था। सिमरन को छोड़कर अन्य तीनों खिलाड़ी ट्रांसजेंडर थी। यह मेडल अंडर 23 और सीनियर कैटेगरी में जीता था। इसमें गर्ल्स और ट्रांसजेंडर मिक्स थे। इस प्रतियोगिता में देशभर के 15 राज्यों से 200 खिलाड़ी आगरा पहुंचे थे। इनमें से 14 राज्य को पीछे छोड़ राजस्थान टीम ने गोल्ड मेडल हासिल किया।
कोच से मिली मदद उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का सपना पूरा करने के लिए आइस स्टॉक राजस्थान के कोच समीर शर्मा के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत कर रही हूं। इस गेम के प्रति रुझान राजस्थान की आइस स्टॉक फैडरेशन की चेयरपर्सन साक्षी शर्मा और राजस्थान ट्रांसजेंडर स्टेट आइकॉन नूर शेखावत है। इन्होंने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया है।
क्या है आइस स्टॉक्स आइस स्टॉक्स गेम को सर्दियों में बर्फ की सतह पर खेला जाता है। इसमें बर्फ की एक सतह पर अलग-अलग क्षेत्र चिह्नित किए जाते हैं। सर्दियों में प्राकृतिक बाहरी बर्फ या इनडोर आइस रिंक पर इसे खेला जाता है। इसे ज्यादातर बर्फीले इलाके के खिलाड़ी खेलते है।



