Star India News
Tue, Nov 3, 2026
Advertisement
Leaderboard Banner

बांग्लादेश में एक्सपोर्ट पर संकट: मजदूर आंदोलन से थमा प्रोडक्शन, PM ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

रविवार को बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग से जुड़े करीब 10 लाख मजदूरों का प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि देश की 529 फ़ैक्ट्रियों में काम ठप रहा बांग्ला के मुताबिक, रविवार को देश के लगभग 9 लाख, 87 हज़ार मज़दूरों…

बांग्लादेश में एक्सपोर्ट पर संकट: मजदूर आंदोलन से थमा प्रोडक्शन, PM ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

रविवार को बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग से जुड़े करीब 10 लाख मजदूरों का प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि देश की 529 फ़ैक्ट्रियों में काम ठप रहा बांग्ला के मुताबिक, रविवार को देश के लगभग 9 लाख, 87 हज़ार मज़दूरों ने कपड़ा फ़ैक्ट्रियों में काम नहीं किया रविवार को बड़ी संख्या में कपड़ा मजदूर सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर उतरे मगर इनकी संख्या ज्ञात नहीं है इंडस्ट्री मालिकों को आशंका है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो सोमवार को भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है 

ये प्रदर्शन राजधानी ढाका के कई इंडस्ट्रियल इलाकों में हो रहे हैं रविवार को हुए प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़, सड़क जाम और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं भी सामने आई हैं पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े, साल 2024 में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने, अंतरिम सरकार के गठन और फिर आम चुनावों के बाद तारिक रहमान की सरकार के सत्ता में आने तक बांग्लादेश ने एक के बाद एक कई हिंसक प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल का दौर देखा है ताज़ा प्रदर्शन में कपड़ा फ़ैक्ट्री के मजदूर अपने न्यूनतम मासिक वेतन को 30 हज़ार टका (लगभग 21 हज़ार रुपये) मासिक न्यूनतम वेतन तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. अभी उनका मौजूदा वेतन 12,500 टका (लगभग 8,800 रुपये) है. यानी वे इसे दोगुना करने की मांग कर रहे हैं 

 

मज़दूरों का कहना है कि खाने-पीने की चीज़ों, मकान किराए, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत ने उनकी ख़रीदने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है उनकी मांग को देखते हुए रविवार को देश के श्रम एवं रोज़गार मंत्री आरिफ़ुल हक़ चौधरी ने रविवार को छह सदस्यीय एक वेतन बोर्ड का गठन किया है और मजदूरों से प्रदर्शन न करने की अपील की है कुछ कपड़ा उद्योग के मज़दूरों ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि सरकार ने भले ही वेतन बोर्ड का गठन कर दिया हो, लेकिन उनका आंदोलन जारी रहेगा, उनका कहना है कि जब तक न्यूनतम वेतन की घोषणा नहीं की जाती, तब तक वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे

 

प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर कपड़ा उद्योग के मज़दूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर आपात बैठक की है रविवार रात सचिवालय में हुई इस बैठक में मंत्रियों और सलाहकारों ने हिस्सा लिया बैठक में क़ानून-व्यवस्था एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि रेडीमेड कपड़ा उद्योग की फ़ैक्ट्रियों में उत्पादन जारी रखा जाए और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और श्रम एवं रोज़गार मंत्री आरिफ़ुल हक़ चौधरी ने कहा कि बैठक में हिंसा से सख़्ती से निपटने का फ़ैसला लिया गया है गृह मंत्री ने कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस पर हमले हुए, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और फ़ैक्ट्रियों में आगज़नी की घटनाएं हुईं. उन्होंने बताया कि कालियाकैर में एक झूट गोदाम में भी आग लगा दी गई.

 

कपड़ा उद्योग के मालिक 30 हज़ार टका न्यूनतम वेतन की मांग को उचित नहीं मानते हैं बीकेएमईए के अध्यक्ष ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला से कहा, "2013 से 2023 के बीच तीन चरणों में मज़दूरी बढ़ाई गई है उन्होंने कहा, "इसके बाद अगर न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 30 हज़ार टका कर दिया जाता है, तो कई फ़ैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी उनके अनुसार, कई नियोक्ता इतनी अधिक मज़दूरी देने में सक्षम नहीं होंगे बीकेएमईए के अध्यक्ष मोहम्मद हातेम ने बीबीसी बांग्ला से कहा, “मज़दूर 30 हज़ार टका न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं.”

 

अचानक बढ़े असंतोष को लेकर बांग्लादेश की राष्ट्रीय मीडिया में सवाल भी उठ रहे हैं. बीबीसी न्यूज़ बंग्ला के मुताबिक़, इन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि मौजूदा अचानक पैदा हुई अशांति के पीछे सिर्फ़ तात्कालिक मांगें ही नहीं हैं.

उनके अनुसार, मज़दूरी और बाज़ार में बढ़ती क़ीमतों के बीच बढ़ता अंतर और विभिन्न समूहों की ओर से की जा रही उकसावे की कोशिशें भी इसकी वजह हो सकती हैं रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि आख़िर मज़दूरों में अचानक यह असंतोष क्यों बढ़ा है क्या यह सिर्फ़ वेतन बढ़ाने की मांग है, या इसके पीछे कोई और मक़सद भी काम कर रहा है? ढाका से प्रकाशित होने वाले बंग्ला समाचार पत्र बोनिक बार्ता के हवाले से बीबीसी न्यूज़ बांग्ला ने बताया है कि क़ानून-व्यवस्था एजेंसियों का कहना है कि ढाका और गाज़ीपुर में हुए हिंसक मज़दूर प्रदर्शनों में प्रतिबंधित अवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों के नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हैं एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित छात्र लीग की जगन्नाथ विश्वविद्यालय इकाई के संगठन सचिव सजमुल इस्लाम ने गाज़ीपुर के कालियाकैर में एक जुलूस का नेतृत्व किया था 

 

Share this story
Editorial Team
Editorial Team · Star India News

The editorial team at Star India News.

More from Editorial Team →

Comments

Be the first to comment on this story.