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बटाला-अमृतसर नेशनल हाईवे पर चलती कार आग का गोला बन गई;गर्मियों में बढ़ता रिस्क, ओवरहीटिंग के 10 संकेत, कार को ठंडा रखने के 8 टिप्स

27 अप्रैल को बटाला-अमृतसर नेशनल हाईवे पर चलती कार आग का गोला बन गई। ऐसा ही एक हादसा जालौन (यूपी) के नेशनल हाईवे-27 पर भी हुआ, जहां कार में अचानक आग लग गई। दोनों हादसों की वजह भीषण गर्मी और शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। गनीमत ये रही कि दोनों हादसों में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।

गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही भी कार ब्लास्ट का कारण बन सकती है।

  • गर्मियों में कार ब्लास्ट का रिस्क क्यों बढ़ता है?
  • गर्मियों में कार को कैसे ठंडा रखें?

सवाल- गर्मियों में कार ब्लास्ट का रिस्क क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- ज्यादा गर्मी से कार के अंदर प्रेशर बढ़ जाता है। अगर कार में डिओ, परफ्यूम, सैनिटाइजर या लाइटर जैसी ज्वलनशील चीजें हों तो ब्लास्ट का रिस्क बढ़ जाता है। बैटरी ओवरहीट होकर गैस बना सकती है। पेट्रोल लीकेज होने पर आग लग सकती है।

सवाल- धूप में खड़ी कार का तापमान बाहर के तापमान से कितने डिग्री ज्यादा होता है?

जवाब- सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, अगर बाहर का तापमान 40°C है और कार 20 मिनट तक धूप में खड़ी है तो अंदर का तापमान करीब 53°C तक पहुंच सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से समझें कि तेज धूप में खड़ी कार के भीतर तापमान किस तरह तेजी से बढ़ता है।

सवाल- कार के टायर और बैटरी पर गर्मी का क्या असर पड़ता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • गर्मी के कारण टायर की हवा विस्तार लेती है, जिससे अंदर का प्रेशर बढ़ जाता है।
  • अगर टायर में ज्यादा हवा है या सड़क बहुत गर्म है तो टायर फटने (ब्लास्ट) का रिस्क बढ़ जाता है।
  • वहीं ज्यादा तापमान के कारण बैटरी में केमिकल रिएक्शन तेज हो जाते हैं।
  • ओवरहीटिंग से बैटरी फ्लूइड तेजी से भाप (गैस) बनने लगता है।
  • अगर वेंटिलेशन या मेंटेनेंस ठीक न हो तो बैटरी डैमेज हो सकती है या गंभीर मामलों में बैटरी फट भी सकती है।

सवाल- गर्मी का फ्यूल टैंक पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- फ्यूल टैंक को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह प्रेशर संभाल सके। हालांकि, टेम्परेचर बहुत ज्यादा बढ़ने पर-

  • पेट्रोल भाप बनने लगता है। इससे टैंक और फ्यूल लाइनों में दबाव बढ़ता है।
  • अगर कहीं लीकेज हो, पेट्रोल टैंक की कैप ढीली हो या पाइप/सील खराब हों तो ये ज्वलनशील वैपर बाहर निकलकर किसी स्पार्क (इलेक्ट्रिकल फॉल्ट, गर्म इंजन पार्ट) से आग पकड़ सकते हैं।

सवाल- गर्मी में कौन-सी चीजें कार के अंदर नहीं रखनी चाहिए?

जवाब- तेज धूप में खड़ी कार के अंदर का तापमान बाहर से कई गुना ज्यादा हो सकता है। इससे छोटी-मोटी चीजें भी खतरनाक बन सकती हैं।

सवाल- क्या बैटरी/इलेक्ट्रॉनिक्स (फोन, लैपटॉप) कार में रखने पर खराब हो सकते हैं?

जवाब- हां, गर्मियों में कार के अंदर फोन, लैपटॉप या पावर बैंक जैसी बैटरी वाली डिवाइस खराब हो सकती हैं।

सवाल- गर्मियों में कार पार्क करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • हमेशा कोशिश करें कि कार छांव या कवर में खड़ी हो।
  • अगर खुली जगह है तो सनशेड/विंडशील्ड कवर इस्तेमाल करें।
  • कार के अंदर डिओ, परफ्यूम, सैनिटाइजर, लाइटर, पावर बैंक, फोन/लैपटॉप जैसी ज्वलनशील या बैटरी वाली चीजें बिल्कुल न छोड़ें।
  • खिड़कियां हल्की-सी (1–2 सेमी) खुली छोड़ने से अंदर की गर्म हवा निकलती रहती है।
  • पार्किंग से पहले देख लें कि कहीं फ्यूल या ऑयल लीकेज तो नहीं है।
  • लंबे समय के लिए खड़ी कर रहे हैं तो टायर प्रेशर और कूलेंट लेवल भी मेंटेन रखें।

ये छोटे कदम ओवरहीटिंग, आग या डैमेज के रिस्क को काफी कम कर देते हैं।

सवाल- कार में बैठने से पहले उसे जल्दी ठंडा कैसे करें?

जवाब- ये छोटे-छोटे तरीके अपनाने से कार जल्दी कूल हो सकती है। पॉइंटर्स में देखिए-

  • डोर फ्लश टेक्निक अपनाएं (एक दरवाजा खोलकर दूसरे को 2-3 बार खोलें-बंद करें।)
  • स्टीयरिंग और सीट कवर का इस्तेमाल करें।
  • डैशबोर्ड पर हल्का पानी स्प्रे कर सकते हैं।
  • AC वेंट के सामने हल्का गीला कपड़ा रखें। (हवा ज्यादा ठंडी हो जाएगी।)
  • बैक सीट AC वेंट भी ऑन करें।
  • इससे पूरी कार में कूलिंग जल्दी फैलती है।

सवाल- ड्राइविंग के दौरान कार को कूल कैसे रखें?

जवाब- कुछ आसान तरीके अपनाकर कार को कूल और आरामदायक रखा जा सकता है। इसके लिए-

  • कार स्टार्ट करने से पहले 1-2 मिनट के लिए विंडो खोलें।
  • अंदर जमा गर्म हवा बाहर निकलने दें।
  • शुरुआत में फैन हाई स्पीड पर चलाएं।
  • अब विंडो पूरी तरह बंद कर लें।
  • फिर एसी ऑन करें, कूलिंग जल्दी होगी।
  • कुछ देर बाद फैन स्पीड मीडियम कर दें।
  • केबिन ठंडा होने के बाद रिसर्कुलेशन मोड ऑन करें।
  • इससे कूलिंग बनी रहती है और एसी पर लोड कम पड़ता है।
  • टेम्परेचर 22–24°C के बीच रखें।
  • एसी वेंट्स को सीधे चेहरे या सीने की तरफ न करें।
  • इससे कूलिंग स्थिर और आरामदायक रहती है।
  • सनशेड/कर्टेन यूज करें।
  • लंबी ड्राइव में कुछ-कुछ देर पर विंडो खोलकर फ्रेश एयर लें।

सवाल- गर्मियों में टायर प्रेशर कितना होना चाहिए?

जवाब- अपनी गाड़ी का टायर प्रेशर निर्माता द्वारा दिए गए मानक के अनुसार रखें। हालांकि, गर्मियों में टायर प्रेशर मानक से थोड़ा कम रखना ज्यादा सेफ माना जाता है। ज्यादातर ‘हैचबैक’ और ‘सेडान’ कारों में गर्मियों में लगभग 30–33 PSI का प्रेशर सेफ माना जाता है। कुछ ऑटो एक्सपर्ट्स 28–34 PSI की रेंज देते हैं, लेकिन हमेशा मैनुअल के अनुसार देखें। अप्रैल–जून के तेज गर्मियों में हर 7–10 दिन में एक बार टायर प्रेशर जरूर चेक करवाएं।

सवाल- इंजन कूलेंट गाड़ी के लिए कितना अहम है?

जवाब- इंजन कूलेंट ही इंजन के टेम्परेचर को कंट्रोल करता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • इंजन चलने पर हीट पैदा करता है और कूलेंट उस गर्मी को सोखकर रेडिएटर के जरिए बाहर निकालता है।
  • अगर कूलेंट कम हो या खराब हो जाए तो इंजन तेजी से गर्म होकर बंद पड़ सकता है, गैस्केट खराब हो सकती है या गंभीर डैमेज तक हो सकता है।

सवाल- कार ओवरहीट हो रही है, ये कैसे पहचानें?

जवाब- ऐसे में कुछ सिग्नल इग्नोर नहीं करने चाहिए। जैसे-

  • टेम्परेचर मीटर की सुई नॉर्मल से ऊपर चली जाए।
  • इंडिकेटर रेड जोन के पास पहुंचने लगे।
  • डैशबोर्ड पर वार्निंग (थर्मामीटर) लाइट ऑन हो जाए।
  • बोनट के नीचे सफेद भाप/धुआं दिखे।
  • कूलेंट ओवरहीट होने के संकेत मिलें।
  • रबर या प्लास्टिक जलने जैसी स्मेल आए।
  • गाड़ी की स्पीड अचानक कम हो जाए।
  • एक्सेलरेशन में झटके महसूस हों।
  • इंजन से टक-टक या नॉकिंग की आवाज आए।
  • एसी की कूलिंग अचानक कम हो जाए।कुल मिलाकर, थोड़ी सतर्कता और सही आदतें अपनाकर न सिर्फ कार को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि अपनी और दूसरों की जान का जोखिम भी टाला जा सकता है।

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