मध्य प्रदेश

100 से अधिक पुरुष याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत:नर्सिंग ऑफिसर भर्ती मामला, भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की विशाल घगट की एकलपीठ ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के 800 से अधिक पदों पर भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सिवनी निवासी अजय कुमार सहित 100 से अधिक पुरुष याचिकाकर्ताओं को इन पदों के लिए आवेदन करने और भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि, उनके परिणाम और नियुक्ति अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।

शनिवार को हुई सुनवाई में एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दरअसल, पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026 के विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने दलील दी कि विज्ञापन में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है, जिससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन से वंचित हो गए हैं।

प्रावधान वैधानिक नियमाें के विपरीत

याचिका में कहा गया है कि ‘मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023’ में नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए किसी प्रकार का लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में भर्ती विज्ञापन का यह प्रावधान वैधानिक नियमों के विपरीत है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पुरुष और महिला दोनों समान पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग/जीएनएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है, इसलिए केवल लिंग के आधार पर उन्हें सार्वजनिक रोजगार से बाहर करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है।

याचिका में मांग की गई है कि विज्ञापन के उस प्रावधान को निरस्त किया जाए, जिसमें सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई पर शासन पक्ष को जवाब प्रस्तुत करना होगा।

विवाद से अंतरिम राहत तक की टाइम लाइन

  • 02 अप्रैल 2026: भर्ती विज्ञापन जारी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 800 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया।
  • 08 अप्रैल 2026: पुरुष अभ्यर्थियों की पहली बड़ी चुनौती संतोष कुमार लोधी एवं अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने विज्ञापन को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
  • 15 अप्रैल 2026: सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विशाल बघेल ने तर्क दिया कि भर्ती नियम 2023 में लिंग आधारित कोई प्रतिबंध नहीं है। कोर्ट ने संतोष कुमार लोधी सहित 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने और उनके आवेदन स्वीकार करने के निर्देश दिए।
  • 18 अप्रैल 2026: राहत का दायरा बढ़ा, 100 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हाईकोर्ट ने एक अन्य सुनवाई में अजय कुमार (सिवनी) और 100 से अधिक अन्य पुरुष उम्मीदवारों को भी अंतरिम राहत प्रदान की।
  • 18 अप्रैल 2026: ज्योति साहू एवं अन्य उम्मीदवारों ने भर्ती नियमों के उल्लंघन और जीव विज्ञान की अनिवार्यता के खिलाफ याचिकाएं दायर कीं।

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