अर्जुन रामपाल की 14 फिल्में फ्लॉप, किराया नहीं दे पाए:मॉडल से एक्टर बने; निगेटिव रोल्स से स्टारडम मिला, ‘धुरंधर’ ने किस्मत बदली

एक समय बॉलीवुड में अपनी स्टाइल और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचाने जाने वाले अर्जुन रामपाल का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। मॉडलिंग से फिल्मों में आए अर्जुन ने शुरुआत में पहचान बनाई, लेकिन लंबे समय तक उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।
इस दौर में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर का किराया भरना भी मुश्किल हो गया था। करीब 14 फिल्मों की असफलता ने उनके करियर पर सवाल खड़े किए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के दौर में उन्होंने खुद को तराशा और अभिनय पर काम जारी रखा।
समय के साथ उन्हें ‘रॉक ऑन’ जैसी फिल्मों से सराहना मिली और अब ‘धुरंधर’ के जरिए उनकी किस्मत फिर चमकती नजर आ रही है।
आज की सक्सेस स्टोरी में अर्जुन रामपाल के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें जानते हैं।

सेना का अनुशासन और मां के संस्कारों का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव
अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की। उनके पिता अमरजीत रामपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां ग्वेन रामपाल स्कूल टीचर थीं।
सेना के अनुशासन और मां के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। इसी वजह से उनमें अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही मजबूत होती गई।
अर्जुन रामपाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि फैशन और विज्ञापनों की ओर बढ़ी। शुरुआत में उनका इरादा मॉडलिंग में आने का नहीं था, लेकिन उनकी पर्सनालिटी और लुक्स ने उन्हें इस ओर खींच लिया।
मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया ने मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया
दरअसल एक पार्टी में उनकी मुलाकात पूर्व मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया से हुई। उन्होंने उन्हें मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बड़े फैशन डिजाइनर्स और ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक शुरू किया और जल्द ही भारत के वे प्रमुख मेल मॉडल्स में शामिल हो गए।
1990 के दशक में वे कई विज्ञापनों और फैशन शोज का हिस्सा बने। इससे उनकी पहचान तेजी से बढ़ी और बॉलीवुड में आने से पहले ही उन्होंने मॉडलिंग में नाम बना लिया।

पहली फिल्म में मनीषा कोइराला के साथ मौका मिला
मॉडलिंग के दौरान उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और विज्ञापनों की लोकप्रियता ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींचा। इसी दौरान अशोक मेहता ने उन्हें फिल्म ‘मोक्ष’ (2001) में मनीषा कोइराला के अपोजिट कास्ट किया। दूसरी फिल्म ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ में निर्देशक राजीव राय ने उन्हें एक विज्ञापन में देखा और प्रभावित होकर कास्ट किया।
हालांकि यह फिल्म ‘मोक्ष’ से पहले रिलीज हुई थी। इसमें अर्जुन रामपाल के साथ सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासनी और कीर्ति रेड्डी नजर आए।
घर का किराया भरने के भी पैसे नहीं थे
पॉप डायरीज को दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था- मैं अपने करियर की शुरुआत में एक बेहद सफल मॉडल था। उसी दौरान अशोक मेहता मेरे पास फिल्म ‘मोक्ष’ लेकर आए, जिसमें मुझे मनीषा कोइराला के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय वह अपने करियर के शिखर पर थीं।
मुझे याद है, हम चंबल घाटी में एक सीन शूट कर रहे थे। जब मैंने शूटिंग का फुटेज देखा, तो खुद को देखकर मुझे खुद से ही नफरत हो गई। मैंने सोचा, ‘हे भगवान, मैं कितना खराब दिख रहा हूं।’ उसी वक्त मैंने फैसला किया कि अब मैं मॉडलिंग नहीं करूंगा। लेकिन मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस फिल्म को बनने में छह साल लग जाएंगे।
उस दौरान मेरे पास आय का कोई स्रोत नहीं था। मैं मुंबई के अंधेरी स्थित सेवन बंगलों में रहता था। मेरे मकान मालिक सरदारजी बहुत अच्छे इंसान थे। हर महीने की पहली तारीख को वे आते, मुझे देखते और मैं उन्हें देखता। वे मुस्कुराकर पूछते, ‘नहीं है ना?’ और मैं सिर हिला देता। तब वे कहते, ‘कोई बात नहीं, तू दे देगा।’
जिंदगी में ऐसे अच्छे लोग और ऐसे पल बहुत मायने रखते हैं।”
फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया
बहरहाल, ‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन आलोचकों ने अर्जुन रामपाल के अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की सराहना की।
बैक टू बैक 14 फ्लॉप फिल्में दीं
‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ के बाद अर्जुन रामपाल ने ‘दीवानापन’, ‘तहजीब’, ‘दिल है तुम्हारा’, ‘दिल का रिश्ता’, ‘असंभव’, ‘वादा’, ‘आंखें’, ‘हमको तुमसे प्यार है’, ‘यकीन’, ‘डरना जरूरी है’, ‘ऐलान’ और ‘एक अजनबी’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इन फिल्मों को कमर्शियल सफलता नहीं मिली।
‘दिल है तुम्हारा’ की कहानी और संगीत को पसंद किया गया था। अर्जुन रामपाल को अक्सर स्टाइलिश हीरो के तौर पर देखा गया, न कि गंभीर अभिनेता के रूप में। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अलग-अलग किरदारों में खुद को आजमाते रहे।
विलेन अवतार ने स्टारडम दिलाया
शाहरुख खान की ‘डॉन’ (2006) में अर्जुन रामपाल ने अपने निगेटिव किरदार से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। इस फिल्म में उन्होंने सख्त और प्रभावशाली किरदार निभाया, जिसने उनकी स्टाइलिश हीरो वाली छवि से अलग एक गंभीर अभिनेता की पहचान मजबूत की।
इसके बाद ‘ओम शांति ओम’ (2007) में उनका विलेन अवतार और ज्यादा चर्चा में रहा। इस फिल्म में उनके किरदार की स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी और खलनायक वाली ऊर्जा को पसंद किया गया। इसी वजह से उन्हें सिर्फ मॉडल-टर्न-एक्टर नहीं, बल्कि ऐसे अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा जो निगेटिव भूमिकाओं में असर छोड़ सकता है। उनके विलेन अवतार ने उन्हें स्टारडम दिलाया।
रॉक ऑन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला
‘रॉक ऑन’ अर्जुन रामपाल के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में फरहान अख्तर, प्राची देसाई, ल्यूक केनी और पूरब कोहली भी थे, लेकिन अर्जुन रामपाल ने अपने गहरे किरदार से पहचान बनाई।
इस फिल्म से पहले तक उन्हें अक्सर स्टाइलिश चेहरे के रूप में देखा जाता था, लेकिन ‘रॉक ऑन’ ने यह धारणा बदल दी। फिल्म में उनके अभिनय ने दिखाया कि वे ग्लैमर या निगेटिव रोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक और परिपक्व किरदार भी असरदार तरीके से निभा सकते हैं।
‘रॉक ऑन’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दर्शकों ने इसकी कहानी, संगीत और कलाकारों की परफॉर्मेंस को सराहा। इसी फिल्म के लिए अर्जुन रामपाल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जिस



