ब्लैकलिस्ट होंगे गलत जानकारी वाले FASTag:NHAI ने बैंकों को व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर वेरीफाई करने के निर्देश दिए; पहले खत्म की थी KYV प्रोसेस

केंद्र सरकार ने बुधवार को FASTag जारी करने वाले बैंकों के लिए एक नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने बैंकों से कहा है कि वे टैग से जुड़े वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) की तुरंत जांच करें।
अगर किसी FASTag में गाड़ी का नंबर गलत पाया जाता है या वह डेटा से मैच नहीं करता है, तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने यह कदम टोल सिस्टम में डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाया है।
डेटा सुधारने के लिए बैंकों को सख्त निर्देश
सरकार ने एक ऑफिशियल प्रेस रिलीज में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम में डेटा की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए NHAI ने सभी FASTag जारीकर्ता बैंकों को निर्देश दिए हैं।
बैंकों को उनके द्वारा जारी किए गए FASTag से जुड़े व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबरों का तत्काल वैलिडेशन करना होगा। इस कदम का उद्देश्य टोलिंग सिस्टम में हो रही गड़बड़ियों को खत्म करना है।
नंबर प्लेट-FASTag डेटा में अंतर मिलने पर कार्रवाई
यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें पाया गया था कि टोल प्लाजा पर लगे FASTag रीडर जो नंबर कैप्चर कर रहे हैं, वह वाहन की फिजिकल नंबर प्लेट से मेल नहीं खा रहा है।
सरकार के मुताबिक, इस तरह की गड़बड़ियों से न केवल सरकारी राजस्व यानी रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है, बल्कि यह मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत दंडनीय अपराध भी है। इससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों के काम में भी रुकावट आती है।
पुराने FASTags में ज्यादा समस्या आ रही
सरकार का मानना है कि डेटा मिसमैच की सबसे ज्यादा समस्या उन FASTags में है जो वाहन (VAHAN) डेटाबेस के साथ जोड़ने से पहले जारी किए गए थे।
उस समय वेरिफिकेशन की प्रोसेस मैन्युअल होती थी, जिससे गलतियां होने की संभावना ज्यादा रहती थी। अब सरकार सभी पुराने और नए डेटा को ऑटोमेटेड सिस्टम से पूरी तरह सिंक करना चाहती है।
वेरिफिकेशन के दौरान गलत टैग ब्लैकलिस्ट होंगे
निर्देशों के अनुसार, बैंकों को अपने रिकॉर्ड की गहन जांच करनी होगी। अगर वेरिफिकेशन के दौरान किसी FASTag के साथ लिंक किया गया रजिस्ट्रेशन नंबर गलत या अवैध पाया जाता है, तो बैंक उस टैग को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर देंगे।
इससे वाहन मालिक को टोल प्लाजा पर परेशानी हो सकती है, इसलिए यूजर्स को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी जानकारी अपडेट रखें।
यूजर एक्सपीरियंस बेहतर बनाना है मकसद
सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रोसेस का मकसद टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना और पारदर्शिता लाना है। इससे न केवल सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों का अनुभव भी बेहतर होगा और टैग के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगेगी।
फास्टैग के लिए KYV प्रोसेस खत्म की थी
इससे पहले नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 1 फनवरी से नई कार के लिए KYV प्रोसेस बंद करने का फैसला किया था। यानी नई कार, जीप और वैन के लिए फास्टैग जारी करते समय अब KYV (नो योर व्हीकल) प्रोसेस की जरूरत नहीं होती है। साथ ही जिन कारों पर पहले से फास्टैग लगा है, उनके मालिकों को भी अब रुटीन KYV कराने की जरूरत नहीं होती है।
इससे वाहन मालिकों को वैलिड डॉक्युमेंट होने के बावजूद लंबी वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है। पहले यूजर्स को अक्सर शिकायत रहती थी कि टैग एक्टिव होने के बाद भी बैंक या अथॉरिटी की ओर से वेरिफिकेशन के नाम पर देरी की जाती है। नई गाइडलाइन के बाद फास्टैग को बार-बार अपडेट करने की जरूरत खत्म हो गई है।
NHAI ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) जैसी आधुनिक टोलिंग तकनीक लागू की जानी है। इस सिस्टम में गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कैमरा और रीडर चलते वाहन से ही टोल वसूल लेंगे।
सरकार का कहना है कि MLFF सिस्टम में ई-नोटिस भेजने के लिए सटीक डेटा का होना बेहद जरूरी है। अगर डेटा गलत होगा, तो चालान या नोटिस सही व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएगा।
क्या है MLFF तकनीक?
यह एक ऐसा सिस्टम है, जहां कोई टोल गेट नहीं होगा। हाईवे पर लगे सेंसर गाड़ी की गति को धीमा किए बिना उसके FASTag या नंबर प्लेट से पैसा काट लेंगे।
अपना FASTag स्टेटस कैसे चेक करें?
‘My FASTag’ एप या संबंधित बैंक के पोर्टल पर जाकर अपने VRN की स्थिति देख सकते हैं।
यूजर्स क्या करें?
- सुनिश्चित करें कि आपके FASTag का KYC पूरा है।
- चेक करें कि टैग आपकी ही गाड़ी के नंबर पर रजिस्टर्ड है।
- अगर हाल ही में पुरानी गाड़ी खरीदी है, तो पुराना टैग हटाकर नया लगवाएं।
MLFF तकनीक का असर
- टोल प्लाजा पर होने वाली बहसबाजी कम होगी।
- डिजिटल फ्रॉड और कॉमर्शियल वाहनों के पर्सनल टैग के इस्तेमाल पर रोक लगेगी।



