NASA में जाना चाहते थे:अल्लू अर्जुन;पहली फिल्म सुपरहिट, फिर भी लुक के कारण नहीं मिला काम, 18 साल बाद पुष्पा ने सुपरस्टार बनाया
एक लड़का, जिसका जन्म फिल्म इंडस्ट्री में गहरी पकड़ रखने वाले एक बड़े परिवार में हुआ। 3 साल की उम्र में वो पहली बार कैमरे के सामने आया। 20 साल की उम्र में बतौर हीरो पहली फिल्म भी आसानी से मिल गई। नाम था- गंगोत्री, जिसके प्रोड्यूसर कोई और नहीं बल्कि उसके पिता ही थे।
लेकिन असल संघर्ष इसके बाद शुरू हुआ, पहली फिल्म सुपरहिट होने के बावजूद सांवली रंगत के चलते उसको हीरो मटेरियल नहीं माना गया और कोई भी उसे काम देने आगे नहीं आया और फिर एक नए डायरेक्टर की फिल्म बन रही थी। बड़े स्टार्स फिल्म करने में झिझक रहे थे, तब उसकी कास्टिंग की गई। फिल्म का नाम था- आर्या। लव ट्रायंगल वाली ये फिल्म सुपरहिट रही और उसको स्टारडम मिल गया।
बाद में उसी डायरेक्टर के साथ उसने फिल्म पुष्पा की, जो ब्लॉकबस्टर रही और उसे पैन इंडिया स्टार बना दिया। वो डायरेक्टर थे सुकुमार और आज बात हो रही है पैन इंडिया सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की।
अल्लू अर्जुन आज 44 साल के हो गए हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर पढ़िए कहानी एक्टर की जिंदगी की।
अल्लू अर्जुन के दादा ने 1000+ फिल्मों में काम किया
अल्लू अर्जुन के पिता अल्लू अरविंद फेमस फिल्म प्रोड्यूसर हैं और वहीं उनकी मां का नाम निर्मला है। उनके दादा अल्लू रामलिंगैया मशहूर कॉमेडियन थे, जिन्होंने 1000 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनका पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के वेस्ट गोदावरी जिले का पलाकोल्लू है।

अल्लू अर्जुन तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई वेंकटेश एक बिजनेसमैन हैं, जबकि छोटे भाई सिरिश एक एक्टर हैं। उनकी बुआ सुरेखा कोनिडेला, सुपरस्टार चिरंजीवी की पत्नी हैं। चिरंजीवी अल्लू के फूफा और एक्टर राम चरण उनके कजिन हैं।
अल्लू अर्जुन ने अपना बचपन चेन्नई में बिताया, लेकिन 1990 के दशक में उनका परिवार हैदराबाद शिफ्ट हो गया। उन्होंने चेन्नई के सेंट पैट्रिक स्कूल से पढ़ाई की और बाद में हैदराबाद के एमएसआर कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की।


NASA में जाने की ख्वाहिश थी
अल्लू अर्जुन स्कूल में एवरेज स्टूडेंट थे, लेकिन डांस और परफॉर्मेंस में हमेशा आगे रहते थे। वैसे तो चाइल्ड एक्टर के तौर पर अल्लू अर्जुन ने फिल्मों में महज 3 साल की उम्र में एक्टिंग की शुरुआत की थी। हालांकि, फिल्म कंपेनियन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि शुरू में उनका एक्टर बनने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने NASA में काम करने सहित कई करियर ऑप्शन के बारे में सोचा था, लेकिन बाद में उनका इंटरेस्ट खत्म हो गया।
उन्होंने कहा था कि फिल्मी परिवार में पैदा होने का असर होता है और अंत में इंसान फिल्मों की तरफ लौट आता है। बचपन में उन्होंने कई करियर ऑप्शन्स सोचे थे, जैसे पियानो टीचर, मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर, NASA में काम करना या एनिमेटर।

अल्लू अर्जुन के पिता अल्लू अरविंद एक फेमस प्रोड्यूसर हैं। अनुपमा चोपड़ा को दिए एक इंटरव्यू में अल्लू अर्जुन ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वे अपने पिता से भी मार्केट प्राइस के हिसाब से फीस चार्ज करते हैं और वो कोई छूट नहीं देते… हम शुरू से ही साथ काम कर रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था कि उनके पिता प्रोड्यूसर हैं और वे एक्टर, इसलिए काम में किसी तरह का पक्षपात नहीं होता। उनके पिता भले ही बड़े प्रोड्यूसर हों, लेकिन जब वे उनके प्रोजेक्ट में काम करते हैं, तो पूरी फीस मार्केट रेट के अनुसार ही लेते हैं।
पहली फिल्म सुपरहिट, लेकिन फिर भी काम नहीं मिला
2003 में फिल्म गंगोत्री से अल्लू अर्जुन ने बतौर लीड रोल करियर की शुरुआत की थी। जिसे उनके पिता अल्लू अरविंद ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म सुपरहिट थी, लेकिन आलोचकों और दर्शकों के एक वर्ग ने उनके लुक्स को एक मास हीरो के लिए फिट नहीं माना था। फिल्म के बाद उनके पास कोई काम नहीं था और वह लगभग बेरोजगार हो गए थे।
हैदराबाद में 7 मई 2024 को फिल्म आर्या के 20 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक इवेंट में अल्लू अर्जुन ने कहा था गंगोत्री सुपरहिट रही, लेकिन मैं अच्छा नहीं दिखा, इसलिए मुझे अच्छी फिल्में नहीं मिलीं। फिल्म ब्लॉकबस्टर थी, लेकिन एक कलाकार के रूप में यह मेरी असफलता थी कि मैं अपनी पहचान नहीं बना पाया। मैं 0 से -100 पर पहुंच गया था, मैं एकदम अनजान था।
फिर एक दिन वह अपने दोस्त और एक्टर तरुण के साथ नितिन की फिल्म दिल की स्क्रीनिंग में पहुंचे, जहां डायरेक्टर सुकुमार ने उन्हें फिल्म आर्या की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया था कि सुकुमार नए डायरेक्टर थे, लेकिन उनकी लिखी कहानी उन्हें पसंद आई।
एक्टर ने बताया था कि वह रवि तेजा की फिल्म इडियट जैसी कूल फिल्म करना चाहते थे और आर्या उनके लिए वैसी ही फिल्म साबित हुई। उन्होंने खासतौर पर गाने थकधिमिथोम को अपने टैलेंट दिखाने का बड़ा मौका बताया।

फिल्म आर्या ने उन्हें स्टार बना दिया। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने बन्नी और हैप्पी जैसी फिल्मों में काम किया, जहां उनकी डांसिंग और एनर्जी को काफी सराहा गया।
2007 से 2010 के बीच उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में खुद को आजमाया। देसमुदुरु, परुगु और आर्या 2 जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग और इमोशनल रेंज साबित की।
वेदम (2010) में उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
2011 से 2013 के दौरान बद्रीनाथ, जुलायी और इद्दाराम्मयिलाथो जैसी फिल्मों में उन्होंने एक्शन, रोमांस और स्टाइल का बेहतरीन मिक्सर दिखाया।
फिल्म जुलायी में उनकी परफॉर्मेंस को खास तौर पर सराहा गया। इसके बाद 2014 में रेस गुर्रम ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी और यह उनकी पहली 100 करोड़ रुपए कमाने वाली फिल्म बनी।



