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हरिद्वार में जगह-जगह लगे ‘प्रवेश निषेध’ के पोस्टर, हरकी पैड़ी में सख़्ती

सनातन परंपरा के प्रमुख तीर्थ हरकी पैड़ी की धार्मिक मर्यादा और पवित्रता बनाए रखने के लिए श्री गंगा सभा ने कड़ा कदम उठाया है। हरकी पैड़ी क्षेत्र के 10 से अधिक स्थानों पर अहिंदू प्रवेश निषेध से जुड़े सूचना बोर्ड लगाए गए हैं।

इन चीजों पर पूरी तरह प्रतिबंध

श्री गंगा सभा की ओर से यह भी साफ किया गया है कि हरकी पैड़ी और मालवीय द्वीप क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने, फिल्मी गानों पर रील बनाने या किसी भी तरह की वीडियो शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि नियमों के उल्लंघन में बनाई गई कोई भी सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार में श्री गंगा सभा, तीर्थ पुरोहितों, संत-संन्यासियों और विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा सरकार से कुंभ क्षेत्र को “अमृत क्षेत्र” घोषित करने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में केवल हिंदू श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों और स्वयंसेवकों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाए, जिससे सनातन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।

अहिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड

इसी क्रम में गुरुवार रात हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप और अस्थि प्रवाह घाट क्षेत्र में अहिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाए गए।श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने बताया कि इन बोर्डों का उद्देश्य किसी को रोकना नहीं, बल्कि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े नियमों और धार्मिक मर्यादाओं की जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी वही स्थान है, जहां गंगा स्नान, गंगाजल का आचमन, प्रसाद ग्रहण और सनातन आस्था से जुड़े श्रद्धालु आते हैं। इस पवित्रता को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने आगे कहा कि हरकी पैड़ी में लागू नियमों को पूरे कुंभ क्षेत्र में लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। कुंभ क्षेत्र को अमृत क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए, ताकि गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द इस विषय पर निर्णय लेगी।

कोई नया नियम नहीं है

वहीं तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है। अहिंदू प्रवेश निषेध से जुड़ा प्रावधान वर्ष 1916 के म्युनिसिपल एक्ट और नगर निगम के बायलॉज में पहले से मौजूद है। बोर्ड केवल उसी व्यवस्था की सार्वजनिक जानकारी देने का माध्यम हैं, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

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